रोहतक, जानकारी, नक्शा और दर्शनीय स्थल

रोहतक के बारे मे जानकारी-

रोहतक, हरियाणा का एक जिला है, ये नयी दिल्ली अर्थात देश की राजधानी से ७० किलोमीटर उत्तर में स्थित है, और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ से २५० किलोमीटर दक्षिण में है, यह राष्ट्रिय राजमार्ग १० पर है और इसको राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जोड़ने की चर्चा जोरो पर है।

रोहतक का नक्शा

रोहतक का नक्शा गूगल मैप पर

रोहतक शहर दर्शनीय स्थल

बन्नी खेड़ा फार्म, तिल्यार झील, जामा मस्जिद, पीरजादा मस्जिद, राजपूतों प्राचीन स्मारक

रोहतक की जनसंख्या और साक्षरता

रोहतक, हरियाणां का छठवा सबसे ज्यादा जनसँख्या वाला जिला है, 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ की जनसंख्या २ लाख ७४ हजार २ सौ ९२ है और यहाँ की साक्षरता दर 84.08% है।

रोहतक की अन्य जानकारिया

यहाँ के अक्षांश और देशांतर २८ डिग्री ८९०९ मिनट उत्तर और ७६ डिग्री ५७९६ मिनुत पूर्व में है, यहाँ की गवर्निंग बॉडी नगर पालिका परिषद है, यहाँ से कोन्ग्रेस्स पार्टी के दीपेंद्र हूडा सांसद है और बीजेपी के मनीष ग्रोवर बिधायक है, yahaa का क्षेत्रफल ११५ वर्ग किलोमीटर है और समुद्रतल से ऊंचाई २२० मीटर है।

यहाँ का PIN कोड १२४००१ से लेकर १२४०१७ तक है, STD कोड 01262 और वाहनों का रजिस्ट्रशन हरियाणा १२ और हरियाणा ४६ [व्यवसायिक ], यहाँ से राष्ट्रिय राजमार्ग १०, ७१, ७१ए’, स्टेट हाइवे १८ गुजरते है।

रेवाड़ी जानकारी, नक्शा और दर्शनीय स्थल

रेवाड़ी के बारे मे जानकारी

हरियाणा में स्थित रेवाड़ी एक आकर्षक पर्यटन स्‍थल है। यह दिल्ली से मात्र 80 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। महाभारत के अनुसार यह माना जाता है कि पहले यहां पर रेवात नामक राजा का राज था। उसकी पुत्री का नाम रेवती था। वह उसे प्यार से रेवा पुकारता था। उसी के नाम पर उसने इसका नरम रेवा वाड़ी रखा था। बाद में इसका नाम रेवा वाड़ी से बदलकर रेवाड़ी हो गया।

रेवाड़ी का नक्शा

रेवाड़ी का नक्शा गूगल मैप पर

 

रेवाड़ी शहर दर्शनीय स्थल
लाल मस्जिद
बाग वाला तालाब
बड़ा तालाब:
घंटेश्वर मन्दिर

 

पानीपत जानकारी, नक्शा और दर्शनीय स्थल

पानीपत के बारे मे जानकारी

पानीपत, हरियाणा का  एक पुराना और ऐतिहासिक शहर है। यह दिल्ली-चंडीगढ राष्ट्रीय राजमार्ग  पर स्थित है। यह क्षेत्र, हरियाणा के अन्तर्गत आता है और दिल्ली से ९० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।  पुराने  काल में पांडवों एवं कौरवों के बीच महाभारत का युद्ध इसी के पास कुरुक्षेत्र में हुआ था, इसलिये इसका धार्मिक महत्व भी बढ़ गया है। महाभारत युद्ध के समय में युधिष्ठिर ने दुर्योधन से जो पाँच स्थान माँगे थे उनमें से यह भी एक था। यहाँ पर तीन इतिहास प्रसिद्ध युद्ध भी हुए हैं। पहला युद्ध में, सन्‌ 1526 में बाबर ने भारत की तत्कालीन शाही सेना को हराया था। दूसरा युद्ध में, सन्‌ 1556 में अकबर ने उसी स्थल पर अफगान आदिलशाह के जनरल हेमू को परास्त किया था। तीसरा युद्ध में, सन्‌ 1761 में, अहमदशाह दुर्रानी ने मराठों को हराया था। यहाँ अलाउद्दीन द्वारा बनवाया एक मकबरा भी है।

पानीपत का नक्शा

पानीपत शहर का नक्शा गूगल मैप पर

पानीपत शहर दर्शनीय स्थल

पानीपत म्यूजियम, ओल्ड फोर्ट, कबुली शाह मॉके, देवी टेम्पल, बू अली शाह कलंदर तुंब, ग्रेव ऑफ़ इब्राहिम लोधी, सलार गूँज गेट

पानीपत की लड़ाई

पानीपत की लड़ाई, पानीपत में ३ लड़ाईया हुयी है और तीनो ही लड़ाईया भारत के इतिहास में एक न्य ऐतिहासिक मोड़ लाने वाली साबित हुयी है, वैसे तो पानीपत हरियाणा का एक छोटा स गांव है पर इन ३ लड़ाइयों ने पानीपत को भारत के इतिहास में हमेशा के लिए अमर कर दिया, अगर भारत में मुग़ल की नीव की बात हो, तो पानीपत का युध्द याद आता है, अगर हिन्दू राजा और मुघलो के घमासान और निर्णायक युद्ध की बात हो तो पानीपत का दूसरा युद्ध याद आता है, और अगर मराठो की पराजय और भारत से हिन्दू राजाओ के अकाल की शुरबात का जिक्र हो तो भी पानीपत का तृतीय युद्ध याद आता है, इस तरह से पानीपत के युद्ध का अपना एक अलग ही युद्ध है, और हर युद्ध में अनीति का भरपूर इस्तेमाल कर के हिन्दू राजाओ को पराजित किया गया, जीसी मुगल परस्त इतिहासकारो ने बताया भी नहीं।

बाबर के बाद हुमायु ने भारत में मुघलो की नुमाइंदगी की, जब हुमायु को शेरशाह शुरी ने भारत से खदेड़ दिया और फिर शेर शाह सूरी के मृत्यु के बाद ही लौट तो शेरशाह सूरी का पूरा साम्राज्य उसको बिना मेहनत किये ही मिल गया, और जब अकबर १४ साल के आसपास था तभी सीढ़ियों से गिर कर हुमायु का निधन हो गया, उसके बाद जो भी इतिहास में हुआ वो निर्णायक ही रहा।

पानीपत का पहला युद्ध

पानीपत के प्रथम युद्ध के बारे में जब भी बात चलती है तो मुझे बहुत हंसी आती है क्योंकि इस युद्ध में बाबर के पास सिर्फ १५००० सैनिक थे वही लोदी के पास १ लाख ३० हजार थे, फिर भी हार गया लोधी, क्यों हार गया, इसका कारन था, बाबर ने इस युद्ध को धर्म युद्ध का नाम दिया था, अपने हर सैनिक के दिमाग में ये भरने में कामयाब रहा की वो खुद का काम नहीं वल्कि खुदा का काम कर रहे है, इस्लाम को बढ़ने के लिए इस युध्द में उनका जितना जरुरी है, इसलिए बाबर का हर सैनिक जी जान से लड़ा वही लोधी के सैनिक इस आत्मविस्वास में थे हमारे पास सैन्यबल ज्यादा है, यह लड़ाई हरियाणा के पानीपत अमाक गांव में हुयी थी, २१ अप्रैल १५२६ में हुयी थी, और इस युद्ध में बाबर की जीत का कारन था उसकी छोटी छोटी तोपें जिनको वह घोड़ो और ऊँटो की पीढ़ पर लाद कर लाया और उनके चलने से लोधी की सेना माँ शामिल हाथियो में भगदड़ मच गयी और उन्होंने पलटकर अपने ही सेनिको को रदन शुरू कर दिया, जिसके कारन लोधी के सेनिको का मनोबल टूटने लगा कुछ जान बचाने में लग गए और जो सामने दिखे उनको बाबर के सेनिको ने मार दिया, और अंत में लोघी को भी मार गया, इस युद्ध में हिन्दू राजा और राजपूत दोनों ही तटस्थ रहे।

पंचकूला हरियाणा, जानकारी, नक्शा और दर्शनीय स्थल

पंचकूला के बारे मे जानकारी

पंचकूला हरियाणा प्रान्त में चंडीगढ से सटा एक नियोजित शहर है। यह पंचकूला जिले का मुख्यालय भी है। चंडीमंदिर छावनी भी इस शहर में स्थित है। जिला पंचकुला में पंचकुला, बरवाला, पिंजौर, कालका और रायपुर रानी शहर स्थित है। हरियाणा का एकमात्र हिल सटेशन मोरनी भी इसी जिले में स्थित है। २००६ में पंचकुला की अनुमानित जनसंख्या २००००० है। पंचकुला ओर मोहाली चंडीगड़ से सटे दो शहर हैं, इन तीनों शहरों को सामुहिक रूप से चंडीगड़ ट्राइसिटी के नाम से जाना जाता है।
पंचकुला के बारे मे जानकारी

पंचकुला का नक्शा

पंचकुला का नक्शा गूगल मैप पर

पंचकुला शहर के दर्शनीय स्थल

मनसा देवी मंदिर, Yadvinder गार्डन, मोरनी हिल्स, नाडा साहिब, कैक्टस गार्डन, काली माता मंदिर, शालीमार और बेला विस्टा, गुरुद्वारा नाडा साहिब, सरकारिया कैक्टस गार्डन, Yadvinder गार्डन, चिड़ियाघर आदि ChattBir

पलवल, जानकारी, नक्शा और दर्शनीय स्थल

पलवल के बारे मे जानकारी

पलवल आज़ादी में अपना अहम भूमिका रखता है। यहाँ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पहली राजनीतिक गिरफ्तारी हुई थी। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने पलवल में अपने हाथों से एक कमरे बनवाने के लिए नींव रखी। महात्मा गांधी और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ आज़ादी की लड़ाई में पलवल के स्वतंत्रता सेनानियों ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था। महात्मा गांधी के साथ पलवल के लाला गोबिंदराम बेधड़क, दीपचंद सत्याग्रही, लल्लू भाई पटेल, लक्ष्मीनारायण, लछमन दास बंसल, योगेंद्र पाल भारती, लाला भनुआमल मंगला ने आज़ादी की लड़ाई में सहयोग किया था। उन्होंने गांधीजी के साथ जेल यात्राएं भी कीं। 9 अप्रैल 1919 को पंजाब में गांधी जी ऐंट्री पर बैन लगा दिया लेकर पंजाब के सेक्रेटरी ने आदेश जारी कर दिए थे। 10 अप्रैल को जैसे ही महात्मा गांधी पलवल रेलवे स्टेशन पहुँचे तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गांधी जी ने पंजाब में प्रवेश न करने का ब्रिटिश सरकार का आदेश मानने से इनकार कर दिया था। मथुरा के बाद पलवल पहला स्टेशन था, जहाँ ट्रेन को रोककर गांधी जी को गिरफ्तार किया गया। यहाँ से गिरफ्तार कर गांधी जी को मुंबई ले जाकर छोड़ दिया गया।

पलवल का नक्शा

पलवल का नक्शा गूगल मैप पर

 

पलवल शहर के दर्शनीय स्थल

भगवान परशुराम मंदिर, Jangeshwar मंदिर, दाउ जी मंदिर, देवी मंदिर, पंचवटी मंदिर, जैन मंदिर, बाबा Udash नाथ मंदिर, भूरा गिरि मंदिर, शिव मंदिर 4, श्री कृष्ण Tample, हनुमान मंदिर, हरि बोल मंदिर, पहाड़ी वाला मंदिर, Rujhani गुरुद्वारा , तिकोना पार्क, Shradhananda पार्क, डी पार्क, टंकी वाला पार्क, ताऊ देवीलाल पार्क, Dashera ग्राउंड पार्क, हुदा पार्क, गांधी पार्क आदि

हरिद्वार उत्तराखंड, जानकारी, नक्शा और दर्शनीय स्थल

हरिद्वार के बारे में जानकारी

हरिद्वार को कुछ लोग हरद्वार भी कह देते है, हरिद्वार उत्तराखंड का एक जिला है और यह गंगा नदी की दोनों तरफ बसा हुआ है, इस स्थान पर अगर गंगा जी के जल का वेग मापा जाये तो ये २५० किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से बहता है, इसलिए स्नानों के लिए गंगा जी की कम वेग की धराये निकल कर उन पर घाट बनाये गए है और लोहे की जंजीरे भी लगायी गयी है।

हरिद्वार जिले का क्षेत्रफल तो बहुत है, पर शहर का क्षेत्रफल सिर्फ १२.३ वर्ग किलोमीटर है और ये शहर समुद्र तल से ३१४ मीटर की ऊंचाई पर है, इस शहर की जनसंख्या ३ लाख १० हजार ५ सो ६२ है २०११ की जनगणना के अनुसार, इस शहर का पिन कोड २३९४०१ और एसटीडी कोड ०१३३४ है, वाहनों के रजिस्ट्रशन के संख्या ‘यूके ०८’ से शुरू होती है, आधिकारिक भाषाएँ हिंदी और उर्दू है।

हरिद्वार का नक्शा

गूगल मैप की सहायता से निर्मित हरिद्वार का नक्शा

 

हरिद्वार के दर्शनीय स्थल

हरिद्वार पूरी तरह से गंगा जी द्वारा संरक्षित है, आप जिधर भी देखेगे आपको कही न कही गंगा जी दिखाई देंगी, परंतु यहाँ और भी दर्शनीय स्थल है जैसे हर की पौड़ी शांति कुञ्ज आश्रम मनसा देवी चंडी देवी का मंदिर माया देवी का मंदिर भारत माता का मंदिर कनखल नील धरा पक्षी विहार सप्त ऋषि आश्रम

मेवात, हरियाणा

मेवात के बारे मे जानकारी

मेवात भारत का एक ऐतिहासिक व पारंपरिक क्षेत्र है। इसकी सीमा में हरियाणा का मेवात जिला, राजस्थान के अलवर, भरतपुर व धौलपुर जिले तथा साथ लगते उत्तर प्रदेश के क्षेत्र आते हैं मेवात के स्थानीय निवासी ‘मेव’ कहलाते हैं। जिस क्षेत्र में मेव लोग रहते हैं उसे ही मेवात कहा जाता है। मेवात जिला हरियाणा का एक जिला भी है जिसका मुख्यालय नूँह में स्थित है। इस जिले का क्षेत्रफल १९१२ वर्ग किमी है तथा जनसंख्या २०११ की जनगणना के अनुसार 1089406 है।

मेवात का नक्शा

मेवात का नक्शा गूगल मैप पर

मेवात शहर दर्शनीय स्थल

  • फोर्ट कोटला
  • इनडोर फोर्ट
  • शाकिंग मिनारेट्स
  • नल्लड़
  • छुई मई पोंड

महेन्द्रगढ़, हरियाणा

महेन्द्रगढ़ के बारे मे जानकारी

महेंद्रगढ़, हरियाणा का एक समृद्ध शहर है, यह समुद्रतल से २६२ मीटर यानि की ८६० फिट ऊंचाई पर है, इसका कॉऑर्डिनेट्स २८ डिग्री २८ मिनट उत्तर से लेकर ७६ डिग्री १५ मिनट पूर्व तक है, महेंद्रगढ़ गुडगाँव के काफी पास है और यहाँ की जनसंख्या मात्र ३० हजार है, यहाँ पर वाहनों के रजिस्ट्रेशन का क्रमांक ‘हरियाणा ३४’ से शुरू होता है और पोस्टल कोड १२३०२९ है।

महेन्द्रगढ़ हरियाणा में स्थित है यह महेंद्रगढ़ जिला मुख्यालय है। पहले यहां पर पृथ्वीराज चौहान के वंशज अंगपाल का साम्राज्य था। बाद में इस पर मराठों, झज्जार के नवाबों और ब्रिटिश शासकों ने भी शासन किया। महेन्द्रगढ़ की स्थापना १९४८ ई. में की गई थी। नारनौल, दादरी और महेन्द्रगढ़ इसके प्रमुख शहर हैं। इसके उत्तर में भिवानी व रोहतक, पूर्व में रेवाड़ी व अल्वर, दक्षिण में सीकर व जयपुर और पश्चिम में सीकर व झंझनू स्थित है। पिछले दिनों महेन्द्रगढ़ की दादरी तहसील को भिवानी में और गुड़गांव के भिवानी को महेन्द्रगढ़ में जोड़ा गया है। यहां के निवासी बडे हंसमुख और मिलनसार हैं। वह अपने यहां आने वाले यात्री का स्वागत बड़ी गर्मजोशी से करते हैं। पर्यटकों को यहां कहीं भी बोरियत या नीरसता का सामना नहीं करना पड़ता।

महेन्द्रगढ़ का नक्शा

महेन्द्रगढ़ का नक्शा गूगल मैप पर

महेन्द्रगढ़ शहर दर्शनीय स्थल

महेन्द्रगढ़ अपने खूबसूरत पर्यटक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। जल महल, चोर गुम्ब, बीरबल का छाता, शाह विलायत का मकबरा, इब्राहिम खान का मकबरा, नसीबपुर, शाह कुली खान का मकबरा, चामुण्डा देवी मन्दिर

कुरुक्षेत्र, हरियाणा

कुरुक्षेत्र के बारे में जानकारी

कुरुक्षेत्र हरियाणा का एक बहुत ही ऐतिहासिक नगर है, यह २९ डिग्री ९६५७१७ मिनट उत्तर से लेकर ७६ डिग्री ८३७००६ मिनट पूर्वी कॉऑर्डिनेट्स पर बसा हुआ है, इस नगर का सम्पूर्ण क्षेत्रफल १५३० वर्ग किलोमीटर यानि की ५९० वर्ग माइल्स है, यहाँ की जनसंख्या २०११ की जंगड़ना के अनुसार 964655 है, और जनसँख्या घनत्व ६४० व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, यहाँ की प्रमुख क्षेत्रीय भाषा हरिणावी है वैसे पंजाबी और हिंदी भाषा काफी प्रचलन में है, पिनकोड १३६११८, एसटीडी कॉड ०७४४ है, वहां रजिस्ट्रेशन “हरियाणा ०७” से शुरू होता है।

कुरुक्षेत्र हरियाणा राज्य का एक प्रमुख जिला और उसका मुख्यालय है। यह हरियाणा के उत्तर में स्थित है तथा अम्बाला, यमुना नगर, करनाल और कैथल से घिरा हुआ है  इसका शहरी इलाका एक अन्य एटिहासिक स्थल थानेसर से मिला हुआ है। यह एक महत्वपूर्ण हिन्दू तीर्थस्थल है। लोगो का कहना है कि यहीं महाभारत की लड़ाई हुई थी और भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश यहीं ज्योतिसर नामक स्थान पर दिया था। कहा जाता है कि यहाँ स्थित विशाल तालाब का निर्माण महाकाव्य महाभारत में वर्णित कौरवों और पांडवों के पूर्वज राजा कुरु ने करवाया था। कुरुक्षेत्र नाम ‘कुरु के क्षेत्र’ का प्रतीक है।

कुरुक्षेत्र का नक्शा

कुरुक्षेत्र का नक्शा गूगल मैप पर

कुरुक्षेत्र के प्रमुख तीर्थ स्थान एवम पर्यटन स्थल

ब्रह्मसरोवर

सन्निहित सरोवर

भद्रकाली मन्दिर

ज्योतिसर

पिहोवा

श्री स्थानेश्वर महादेव मन्दिर

 

कुरुक्षेत्र की पावन धरती पर श्री स्थानेश्वर महादेव मन्दिर स्थित है। लोक मन्यता है कि महाभारत के युद्ध से पूर्व भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन समेत यहा भगवान शिव की उपासना कर अशिर्वाद प्राप्त किया था। इस तीर्थ की विशेषता यह भी है कि यहा मन्दिर व गुरुद्वरा एक हि दिवार से लगते है। यहा पर हजारो देशी विदेशी यात्री दर्शन हेतु आते हैं।

 

Where is Karnal in Haryana

कर्नल हरियाणा का एक जिला है और एक महत्वपूर्ण शहर भी है, यह चंडीगढ़ से मात्र १२६ किलोमीटर दूर है और यमुना नदी के किनारे पर स्थित है, यहाँ के विधायक श्री मनोहर लाल खट्टर ही इस समय हरियाणा के मुख्यमंत्री है, इसके कॉऑर्डिनेट्स २९ डिग्री ६९ मिनट उत्तर से लेकर ७६ डिग्री ९८ मिनट पूर्व तक है, २०११ की जनगणना के अनुसार यहाँ की जनसँख्या २ लाख ८६ हजार ८ सौ २७ है, पिन कॉड १३२००१, वाहन रजिस्ट्रेशन क्रमांक ‘हरियाणा ०५’ से शुरू होता है, यहाँ की साक्षरता ७५.०५% है एयर यहाँ पर महिलाओ की संख्या पुरुषो से ज्यादा है।

करनाल का इतिहास

करनाल यमुना नदी के किनारे स्थित है। घरौंड़ा, नीलोखेड़ी, असन्ध, इन्द्री और तरावड़ी इसके मुख्य दर्शनीय स्‍थल हैं। करनाल में अनेक फैक्ट्रियां हैं। जिसमे  में वनस्पति तेल, इत्र और शराब तैयार की जाती है। इसके अलावा यह अपने अनाज, कपास और नमक के बाजार के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है। यहां पर प्रमुख धान की खेती की जाती है। और इसका निर्यात विदेशों में किया जाता है। यात्री यहां पर अनेक पर्यटक स्थलों की यात्रा कर सकते हैं। इनमें कलन्दर शाह गुम्बद, छावनी चर्च और सीता माई मन्दिर आदि प्रमुख हैं। करनाल शहर को महाभारत के राजा कर्ण ने बसाया था। करनाल पर नादिरशाह ने मुग़ल बादशाह मुहम्मदशाह को हराया था। 1805 ई. में अंग्रेज़ों ने इस पर अपना अधिकार कर लिया।

करनाल का नक्शा

करनाल शहर दर्शनीय स्थल

-कलन्दर शाह गुम्बद, छावनी चर्च, कर्ण जलाशय, सीता माई मन्दिर, कंजपुरा, तरावड़ी, बास्थली,