कैथल, जानकारी, नक्शा, इतिहास और दर्शनीय स्थल

कैथल के बारे मे जानकारी

कैथल हरियाणा का एक जिला है, पहले यह करनाल जिले का हिस्सा था, फिर या कुरुक्षेत्र जिले का हिस्सा बना और यह १ नवम्बर १९८९ तक कुरुक्षेत्र का ही हिस्सा रहा और कैथल कुरुक्षेत्र जिले का मुख्यालय था, कैथल के चारो तरफ पंजाब का पटियाला, कुरुक्षेत्र, जींद और करनाल जिले है, कैथल हरियाणा के उत्तर पश्चिम हिस्से में स्थित है, कैथल का गुहला-चीका इसे पंजाब से जोड़ता है। यहाँ से विधायक रणदीप सिंह सुरजेवाला और सांसद राज कुमार सैनी है।

कैथल का नक्शा

कैथल का नक्शा गूगल मैप पर

कैथल शहर के दर्शनीय स्थल

कैथल किला: कैथल किला, जो 1767-1843 समय का बना हुआ है, अभी कैथल के शाही परिवार का निवास स्थान है और जनता के लिए एक हिस्सा खुला भी है
रजिया सुल्तान का मकबरा : रजिया सुल्तान का मकबरा, सिंहासन नाम जलालत उद-दीन रज़िया, आमतौर पर रजिया सुल्ताना के रूप में इतिहास में जाना जाता है, वह 1236 से मई 1240 तक दिल्ली की सुल्तान थी।
भारत में सबसे ऊँचा राष्ट्रिय ध्वज : भारत में सबसे ऊँचा राष्ट्रिय ध्वज, कैथल में एक 22-से-14.6-मीटर (48 से 72 फुट) का ध्वज राष्ट्रीय ध्वज हनुमान वाटिका में जो की स्वयं जमीन के ऊपर 63 मीटर (207 फीट) फहराया गया है

कैथल की भोगोलिक जानकारी

कैथल के अक्षांश औए देशांतर इस प्रकार से है २९ डिग्री ८ मिनट उत्तर और ७६ डिग्री ३८ मिनट पूर्व में, इसका क्षेत्रफल २३१७ वर्ग किलोमीटर है, जनसँख्या २०११ की जनगणना के अनुसार १४४९१५ है ये सिर्फ कैथल की है जबकि कैथल जिले की जनसँख्या १०७२८६१ है और इसमें शहरी जनसँख्या २०% है, यह शहर समुद्रतल से २५० मीटर की ऊंचाई पर है , यहाँ की भूमि और जनसँख्या के आधार पर जनसँख्या घनत्व ४६९ व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।

कैथल की अन्य जानकारी

कैथल में १ लोक सभा सीट है जो की कुरुक्षेत्र के साथ साझेदारी में है, इसमें ४ विधान सभाये पड़ती है जो की गुहला, कलायत, कैथल और पूंडरी है, इसमें तहसील भी ४ ही है जिनके नाम वही है जो विधान सभाओ के नाम है, यहाँ का एसटीडी कोड ०१७४६ है पिन १३६०२७ है, वहां पंजीकरण हरियाणा 08 से hai परंतु व्यवसायिक वाहनों के लिए हरियाणा ८८०, यहाँ महिला पुरुष अनुपात ८८० प्रति १००० पुरुषो पर है।

कैथल का इतिहास

कैथल का इतिहास बहुत प्राचीन है, इतना प्राचीन है की हम इसको पांडवो के इतिहास अर्थात महाभारत के इतिहास के साथ जोड़ सकते है, पुराणों और अन्य जानकारी के श्रोतो के अनुसार अब यह प्रमाणित हो चुका है की कैथल नगर की स्थापना महाराजा युधिष्ठिर ने की थी।

युधिषिठर ने इसका नाम कपिस्थल रखा था, क्योंकि एक मान्यता के अनुसार इसी जगह पर महाराजा भीम को भगवान हनुमान ने अपनी विजय ध्वज दी थी अर्जुन के रथ पर लगाने के लिए, किंतु कालांतर में इतना क्लिस्ट और संस्कृत का उच्चारण लोगो के लिए कठिन हो गया तो कपिस्थल का अपभ्रंश नाम कैथल पड़ गया। यह स्थान कुरु साम्राज्य का अभिन्न अंग था।

अगर हम मध्यकालीन इतिहास पर नजर डाले तो जिसने भी दिल्ली में बैठ कर शासन किया कैथल उसके ही अधीन रहा, किन्तु सबसे ज्यादा इस स्थान की ख्याति इस बात से है की यहाँ पर इल्तुतमिश की पुत्री रजिया सुल्तान की हत्या की गयी थी, माना जाता है की रजिया के राज्य के मुख्य अधिकारी लोगो ने जब १३ नवम्बर १२४० में विद्रोह किया तो उसने भाग कर यहाँ पर शरण ली, यहाँ के लोगो ने रजिया का साथ दिया और विद्रोहियो को कड़ी टक्कर दी, पर फिर भी वो रजिया को बचने में सफल न हो सके, तब ग्राम वासियो ने उसको यही पर दफना कर उसका मकबरा बना दिया।

कैथल के इतिहास में, यहाँ पर सिक्खो के राज्य का वर्णन है, यहाँ के राजा देसु सिंह को सिख गुरु से आशीर्वाद प्राप्त था और उनके बाद यहाँ के हर सिख शासक को भाई की उपाधि से संबोधित किया जाता है, १८४३ तक कैथल पर सिखों का राज था भाई उदय सिंह की मृतयु १४ मार्च १८४३ को हो गयी थी जो की अंतिम सिख शासक थे, १० अप्रैल १८४३ को अंग्रेजो ने यहाँ हमला कर दिया यहाँ पर उदय सिंह की माता और उनकी पत्नी बहुत ही बहादुरी से लड़ी, पर ५ दिन बाद ही पटियाला के राजा ने कैथल का साथ देने से मन कर दिया, जिसके फलस्वरूप १५ अप्रैल १८४३ को कैथल अंग्रेजो के अधीन हो गया और मुख्य सेना पति टेक सिंह को कला पानी की सजा हो गयी, इतिहास साक्षी है की अगर अपने अपनों के साथ मुश्किल समय में साथ होते तो भारत देश कभी भी विदेशियो का गुलाम नहीं बनता।

आधुनिक कैथल के इतिहास पर अगर नजर डाले तो यह १९७३ के बाद से ही जन्म है, इसके पहले यह करनाल जिले का हिस्सा था, उसके बाद कुरुक्षेत्र का भाग बन गया, इसको जिला १ नवम्बर १९८९ में बनाया गया है।

यमुना नगर जानकारी, नक्शा और दर्शनीय स्थल

यमुना नगर के बारे मे जानकारी

यमुना नगर जिला, हरियाणा की २१ जिले में एक है, इसको जिले का स्थान १ नवम्बर १९८९ में मिला, यमुना नगर का पहले नाम अब्दुल्लापुर था और तब यमुना नगर इसका मुख्यालय था, यहाँ पर मूल रूप से हिंदी, अंग्रेजी, हरयाणवी और पंजाबी भाषा बोली जाती है।

यमुना नगर का नक्शा

यमुना नगर का नक्शा गूगल मैप पर

यमुना नगर के दर्शनीय स्थल

संतपुरा गुरुद्वारा, बुडीया साहब गुरुद्वारा, चिटटा मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, आदीबद्री, हनुमान गेट गुरुद्वारा, चनेती बुद्धीस्ट स्तूप, कोलसर वन्य जीव अभयारण्य, चैधरी देवी लाल हर्बन नेचर पार्क आदि

यमुनानगर की भोगोलिक जानकारी

यमुनानगर के अक्षांश और देशांतर ३० डिग्री १३३ मिनट उत्तर में और ७७ डिग्री २८८ मिनट पूर्व में है, यमुनानगर का क्षेत्रफल 1756 वर्ग किलोमीटर है, यहाँ की जनसँख्या २०११ की जनगणना के अनुसार २ लाख १६ हजार ६ सौ २८ है, यमुनानगर में जनसँख्या घनत्व ६८७ व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, यह शहर समुद्रतल से २५५ मीटर की ऊंचाई पर है, यहाँ की साक्षरता ८५.७२% है और महिला पुरुष अनुपात ८७७ प्रति १००० पुरुष है, यह मेवात के बाद हरियाणा का सबसे ज्यादा मुस्लिम जनसंख्या वाला जिला है।

यमुनानगर की अन्य जानकरी

यमुनानगर का पिन कोड १३५००१, एसटीडी कोड ०१७३२, यहाँ के वाहनों का पंजीकरण हरियाणा ०२ से शुरू होता है, इस जिले में ३ तहसील है जगाधरी, छछरौली और बिलासपुर, इसमें २ लोक सभा क्षेत्र भी शामिल है पर दोनों का कुछ हिस्सा २ अन्य जिलो में भी आता है, अम्बाला का अम्बाला जिले में और कुरुक्षेत्र का कुरुक्षेत्र में।

सोनीपत, जानकारी, नक्शा और दर्शनीय स्थल

सोनीपत के बारे मे जानकारी

सोनीपत या सोनीपत शहर, इसका नाम पांडवो ने स्वर्णप्रस्थ या सुवर्णप्रस्थ रखा था , आज ये हरियाणा का जिला है और दिल्ली से २० किलोमीटर दूर है, इसको भी भारतीय राष्ट्रिय राजधानी क्षेत्र में शामिल कर लिया गया है, १९७२ में सोनीपत को रोहतक जिले से निकाल कर बनाया गया था, यह यमुना नदी के किनारे बसा है।

सोनीपत का नक्शा

Sonipat ka Naksha गूगल मैप पर

सोनीपत की भोगोलिक जानकारी

सोनीपत के अक्षांस और देशांतर २८ डिग्री ९९० मिनट उत्तर में और 77 डिग्री ०२२ मिनट पूर्व में है, इसका क्षेत्रफल २२६० वर्ग किलोमीटर है, शहर समुद्र तल से २२४ मीटर की ऊंचाई पर है, जनसँख्या १२७८८३०, जनसँख्या घनत्व ५७०, शहरी जनसँख्या ३२१४३२ है, साक्षरता ७३.७१% है, और स्त्री पुरुष अनुपात ८३९/१००० है, इसमें ४ तहसील है जो इस प्रकार है सोनीपत, खरखौदा,गोहाना, गन्नौर।

सोनीपत की अन्य जानकारी

सोनीपत स्वयं लोकसभा क्षेत्र है और इसके अंदर ६ विधान सभा क्षेत्र आते है जो इस प्रकार है गनौर, राइ, खरखौदा, सोनीपत, गोहाना, बरोदा, यहाँ से २ राष्ट्रिय मार्ग गुजरते है राष्ट्रिय राजभर १ और ७१, यहाँ का पिन कोड १३१००१ और एसटीडी कोड ०१३० है, वाहन पंजीकरण संख्या हरियाणा 10, व्यावसायिक वाहनों के लिए हरियाणा ६९ और तत्कालीन में हरियाणा ९९ नम्बर दे दिया जाता है

सोनीपत शहर के दर्शनीय स्थल

सोनीपत का प्रमुख आकर्षण ख्वाजा खिज्र की कब्र है। यह कब्र इब्राहिम लोधी के शासन काल के सन्त और उनके पुत्र के पनाह की अन्तिम स्थान थी। एक ऊँचे चबूतरे पर निर्मित यह कब्र 1522 से 1525 ई0 में बनाई गई थी। यह उन चुनिन्दा इमारतों में से है जिनमें लाल बलुये पत्थर के साथ-साथ कंकड़ के टुकड़ों का प्रयोग किया गया है। कब्र भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है।

सिरसा, जानकारी, नक्शा और दर्शनीय स्थल

सिरसा के बारे मे जानकारी

सिरसा जिला, हरियाणा का सबसे बड़ा जिला है, ये पहले दूसरे नम्बर पर आता था क्षेत्रफल में पर चरखी दादरी बनने के बाद ये जिला क्षेत्रफल में १ नम्बर पर आ गया, यह राष्ट्रिय राजमार्ग ९ पर स्थित है और दिल्ली से मात्र २५० किलोमीटर दूर है , इसका नाम सिरसा, संस्कृत के शब्द शैरीषक से बना है।

सिरसा का नक्शा

Sirsa Ka Naksha गूगल मैप पर

सिरसा शहर के दर्शनीय स्थल

जब भी सिरसा जाएं तो वहां कगदाना में स्थित राम देव मंदिर में भी अवश्‍य जाएं। जैसा कि नाम से ही स्‍पष्‍ट है कि यह मंदिर बाबा राम देवजी को समर्पित है यहां आकर रामनगरिया में हनुमान मंदिर और चोरमार खेरा में गुरूद्वारा गुरू गोविंद सिंह की यात्रा भी अवश्‍य करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सिक्‍ख गुरू अपनी रात यहीं बिताते है। यहां डेरा बाबा सारसाई नाथ मंदिर है, इस मंदिर को सिरसा में हिसार द्वार के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण सारसाई नाथ ने करवाया था, जो एक प्रमुख गुरू या ऋषि थे,

सिरसा की भोगोलिक स्थिति

सिरसा का क्षेत्रफल ४२७७ वर्ग किलोमीटर है, इसके अक्षांश और देशांतर २९ डिग्री ५३ मिंट उत्तर और ७५ डिग्री पूर्व में है, सिरसा में ४ तहसील है सिरसा, डबवाली, रानिया, और ऐलनाबाद है, यहाँ की जनसँख्या १,११६,६४९, जनसँख्या घनत्व २६० व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, शहरी जनसँख्या २६.२८% है।

सिरसा की अन्य जानकारिया

सिरसा के संसद सदस्य चरनजीत सिंह रोरी है, पिन कोड १२५०५५, एसटीडी कोड ०१६६६, वाहन का पंजीकरण हरियाणा २४ से होता है, यहाँ पर साक्षरता ६०.५५% है और स्त्री पुरुष का अनुपात ९९९ प्रति १००० है।

रोहतक, जानकारी, नक्शा और दर्शनीय स्थल

रोहतक के बारे मे जानकारी-

रोहतक, हरियाणा का एक जिला है, ये नयी दिल्ली अर्थात देश की राजधानी से ७० किलोमीटर उत्तर में स्थित है, और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ से २५० किलोमीटर दक्षिण में है, यह राष्ट्रिय राजमार्ग १० पर है और इसको राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जोड़ने की चर्चा जोरो पर है।

रोहतक का नक्शा

रोहतक का नक्शा गूगल मैप पर

रोहतक शहर दर्शनीय स्थल

बन्नी खेड़ा फार्म, तिल्यार झील, जामा मस्जिद, पीरजादा मस्जिद, राजपूतों प्राचीन स्मारक

रोहतक की जनसंख्या और साक्षरता

रोहतक, हरियाणां का छठवा सबसे ज्यादा जनसँख्या वाला जिला है, 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ की जनसंख्या २ लाख ७४ हजार २ सौ ९२ है और यहाँ की साक्षरता दर 84.08% है।

रोहतक की अन्य जानकारिया

यहाँ के अक्षांश और देशांतर २८ डिग्री ८९०९ मिनट उत्तर और ७६ डिग्री ५७९६ मिनुत पूर्व में है, यहाँ की गवर्निंग बॉडी नगर पालिका परिषद है, यहाँ से कोन्ग्रेस्स पार्टी के दीपेंद्र हूडा सांसद है और बीजेपी के मनीष ग्रोवर बिधायक है, yahaa का क्षेत्रफल ११५ वर्ग किलोमीटर है और समुद्रतल से ऊंचाई २२० मीटर है।

यहाँ का PIN कोड १२४००१ से लेकर १२४०१७ तक है, STD कोड 01262 और वाहनों का रजिस्ट्रशन हरियाणा १२ और हरियाणा ४६ [व्यवसायिक ], यहाँ से राष्ट्रिय राजमार्ग १०, ७१, ७१ए’, स्टेट हाइवे १८ गुजरते है।

रेवाड़ी जानकारी, नक्शा और दर्शनीय स्थल

रेवाड़ी के बारे मे जानकारी

हरियाणा में स्थित रेवाड़ी एक आकर्षक पर्यटन स्‍थल है। यह दिल्ली से मात्र 80 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। महाभारत के अनुसार यह माना जाता है कि पहले यहां पर रेवात नामक राजा का राज था। उसकी पुत्री का नाम रेवती था। वह उसे प्यार से रेवा पुकारता था। उसी के नाम पर उसने इसका नरम रेवा वाड़ी रखा था। बाद में इसका नाम रेवा वाड़ी से बदलकर रेवाड़ी हो गया।

रेवाड़ी का नक्शा

रेवाड़ी का नक्शा गूगल मैप पर

 

रेवाड़ी शहर दर्शनीय स्थल
लाल मस्जिद
बाग वाला तालाब
बड़ा तालाब:
घंटेश्वर मन्दिर

 

पानीपत जानकारी, नक्शा और दर्शनीय स्थल

पानीपत के बारे मे जानकारी

पानीपत, हरियाणा का  एक पुराना और ऐतिहासिक शहर है। यह दिल्ली-चंडीगढ राष्ट्रीय राजमार्ग  पर स्थित है। यह क्षेत्र, हरियाणा के अन्तर्गत आता है और दिल्ली से ९० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।  पुराने  काल में पांडवों एवं कौरवों के बीच महाभारत का युद्ध इसी के पास कुरुक्षेत्र में हुआ था, इसलिये इसका धार्मिक महत्व भी बढ़ गया है। महाभारत युद्ध के समय में युधिष्ठिर ने दुर्योधन से जो पाँच स्थान माँगे थे उनमें से यह भी एक था। यहाँ पर तीन इतिहास प्रसिद्ध युद्ध भी हुए हैं। पहला युद्ध में, सन्‌ 1526 में बाबर ने भारत की तत्कालीन शाही सेना को हराया था। दूसरा युद्ध में, सन्‌ 1556 में अकबर ने उसी स्थल पर अफगान आदिलशाह के जनरल हेमू को परास्त किया था। तीसरा युद्ध में, सन्‌ 1761 में, अहमदशाह दुर्रानी ने मराठों को हराया था। यहाँ अलाउद्दीन द्वारा बनवाया एक मकबरा भी है।

पानीपत का नक्शा

पानीपत शहर का नक्शा गूगल मैप पर

पानीपत शहर दर्शनीय स्थल

पानीपत म्यूजियम, ओल्ड फोर्ट, कबुली शाह मॉके, देवी टेम्पल, बू अली शाह कलंदर तुंब, ग्रेव ऑफ़ इब्राहिम लोधी, सलार गूँज गेट

पानीपत की लड़ाई

पानीपत की लड़ाई, पानीपत में ३ लड़ाईया हुयी है और तीनो ही लड़ाईया भारत के इतिहास में एक न्य ऐतिहासिक मोड़ लाने वाली साबित हुयी है, वैसे तो पानीपत हरियाणा का एक छोटा स गांव है पर इन ३ लड़ाइयों ने पानीपत को भारत के इतिहास में हमेशा के लिए अमर कर दिया, अगर भारत में मुग़ल की नीव की बात हो, तो पानीपत का युध्द याद आता है, अगर हिन्दू राजा और मुघलो के घमासान और निर्णायक युद्ध की बात हो तो पानीपत का दूसरा युद्ध याद आता है, और अगर मराठो की पराजय और भारत से हिन्दू राजाओ के अकाल की शुरबात का जिक्र हो तो भी पानीपत का तृतीय युद्ध याद आता है, इस तरह से पानीपत के युद्ध का अपना एक अलग ही युद्ध है, और हर युद्ध में अनीति का भरपूर इस्तेमाल कर के हिन्दू राजाओ को पराजित किया गया, जीसी मुगल परस्त इतिहासकारो ने बताया भी नहीं।

बाबर के बाद हुमायु ने भारत में मुघलो की नुमाइंदगी की, जब हुमायु को शेरशाह शुरी ने भारत से खदेड़ दिया और फिर शेर शाह सूरी के मृत्यु के बाद ही लौट तो शेरशाह सूरी का पूरा साम्राज्य उसको बिना मेहनत किये ही मिल गया, और जब अकबर १४ साल के आसपास था तभी सीढ़ियों से गिर कर हुमायु का निधन हो गया, उसके बाद जो भी इतिहास में हुआ वो निर्णायक ही रहा।

पानीपत का पहला युद्ध

पानीपत के प्रथम युद्ध के बारे में जब भी बात चलती है तो मुझे बहुत हंसी आती है क्योंकि इस युद्ध में बाबर के पास सिर्फ १५००० सैनिक थे वही लोदी के पास १ लाख ३० हजार थे, फिर भी हार गया लोधी, क्यों हार गया, इसका कारन था, बाबर ने इस युद्ध को धर्म युद्ध का नाम दिया था, अपने हर सैनिक के दिमाग में ये भरने में कामयाब रहा की वो खुद का काम नहीं वल्कि खुदा का काम कर रहे है, इस्लाम को बढ़ने के लिए इस युध्द में उनका जितना जरुरी है, इसलिए बाबर का हर सैनिक जी जान से लड़ा वही लोधी के सैनिक इस आत्मविस्वास में थे हमारे पास सैन्यबल ज्यादा है, यह लड़ाई हरियाणा के पानीपत अमाक गांव में हुयी थी, २१ अप्रैल १५२६ में हुयी थी, और इस युद्ध में बाबर की जीत का कारन था उसकी छोटी छोटी तोपें जिनको वह घोड़ो और ऊँटो की पीढ़ पर लाद कर लाया और उनके चलने से लोधी की सेना माँ शामिल हाथियो में भगदड़ मच गयी और उन्होंने पलटकर अपने ही सेनिको को रदन शुरू कर दिया, जिसके कारन लोधी के सेनिको का मनोबल टूटने लगा कुछ जान बचाने में लग गए और जो सामने दिखे उनको बाबर के सेनिको ने मार दिया, और अंत में लोघी को भी मार गया, इस युद्ध में हिन्दू राजा और राजपूत दोनों ही तटस्थ रहे।

पंचकूला हरियाणा, जानकारी, नक्शा और दर्शनीय स्थल

पंचकूला के बारे मे जानकारी

पंचकूला हरियाणा प्रान्त में चंडीगढ से सटा एक नियोजित शहर है। यह पंचकूला जिले का मुख्यालय भी है। चंडीमंदिर छावनी भी इस शहर में स्थित है। जिला पंचकुला में पंचकुला, बरवाला, पिंजौर, कालका और रायपुर रानी शहर स्थित है। हरियाणा का एकमात्र हिल सटेशन मोरनी भी इसी जिले में स्थित है। २००६ में पंचकुला की अनुमानित जनसंख्या २००००० है। पंचकुला ओर मोहाली चंडीगड़ से सटे दो शहर हैं, इन तीनों शहरों को सामुहिक रूप से चंडीगड़ ट्राइसिटी के नाम से जाना जाता है।
पंचकुला के बारे मे जानकारी

पंचकुला का नक्शा

पंचकुला का नक्शा गूगल मैप पर

पंचकुला शहर के दर्शनीय स्थल

मनसा देवी मंदिर, Yadvinder गार्डन, मोरनी हिल्स, नाडा साहिब, कैक्टस गार्डन, काली माता मंदिर, शालीमार और बेला विस्टा, गुरुद्वारा नाडा साहिब, सरकारिया कैक्टस गार्डन, Yadvinder गार्डन, चिड़ियाघर आदि ChattBir

पलवल, जानकारी, नक्शा और दर्शनीय स्थल

पलवल के बारे मे जानकारी

पलवल आज़ादी में अपना अहम भूमिका रखता है। यहाँ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पहली राजनीतिक गिरफ्तारी हुई थी। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने पलवल में अपने हाथों से एक कमरे बनवाने के लिए नींव रखी। महात्मा गांधी और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ आज़ादी की लड़ाई में पलवल के स्वतंत्रता सेनानियों ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था। महात्मा गांधी के साथ पलवल के लाला गोबिंदराम बेधड़क, दीपचंद सत्याग्रही, लल्लू भाई पटेल, लक्ष्मीनारायण, लछमन दास बंसल, योगेंद्र पाल भारती, लाला भनुआमल मंगला ने आज़ादी की लड़ाई में सहयोग किया था। उन्होंने गांधीजी के साथ जेल यात्राएं भी कीं। 9 अप्रैल 1919 को पंजाब में गांधी जी ऐंट्री पर बैन लगा दिया लेकर पंजाब के सेक्रेटरी ने आदेश जारी कर दिए थे। 10 अप्रैल को जैसे ही महात्मा गांधी पलवल रेलवे स्टेशन पहुँचे तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गांधी जी ने पंजाब में प्रवेश न करने का ब्रिटिश सरकार का आदेश मानने से इनकार कर दिया था। मथुरा के बाद पलवल पहला स्टेशन था, जहाँ ट्रेन को रोककर गांधी जी को गिरफ्तार किया गया। यहाँ से गिरफ्तार कर गांधी जी को मुंबई ले जाकर छोड़ दिया गया।

पलवल का नक्शा

पलवल का नक्शा गूगल मैप पर

 

पलवल शहर के दर्शनीय स्थल

भगवान परशुराम मंदिर, Jangeshwar मंदिर, दाउ जी मंदिर, देवी मंदिर, पंचवटी मंदिर, जैन मंदिर, बाबा Udash नाथ मंदिर, भूरा गिरि मंदिर, शिव मंदिर 4, श्री कृष्ण Tample, हनुमान मंदिर, हरि बोल मंदिर, पहाड़ी वाला मंदिर, Rujhani गुरुद्वारा , तिकोना पार्क, Shradhananda पार्क, डी पार्क, टंकी वाला पार्क, ताऊ देवीलाल पार्क, Dashera ग्राउंड पार्क, हुदा पार्क, गांधी पार्क आदि

हरिद्वार उत्तराखंड, जानकारी, नक्शा और दर्शनीय स्थल

हरिद्वार के बारे में जानकारी

हरिद्वार को कुछ लोग हरद्वार भी कह देते है, हरिद्वार उत्तराखंड का एक जिला है और यह गंगा नदी की दोनों तरफ बसा हुआ है, इस स्थान पर अगर गंगा जी के जल का वेग मापा जाये तो ये २५० किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से बहता है, इसलिए स्नानों के लिए गंगा जी की कम वेग की धराये निकल कर उन पर घाट बनाये गए है और लोहे की जंजीरे भी लगायी गयी है।

हरिद्वार जिले का क्षेत्रफल तो बहुत है, पर शहर का क्षेत्रफल सिर्फ १२.३ वर्ग किलोमीटर है और ये शहर समुद्र तल से ३१४ मीटर की ऊंचाई पर है, इस शहर की जनसंख्या ३ लाख १० हजार ५ सो ६२ है २०११ की जनगणना के अनुसार, इस शहर का पिन कोड २३९४०१ और एसटीडी कोड ०१३३४ है, वाहनों के रजिस्ट्रशन के संख्या ‘यूके ०८’ से शुरू होती है, आधिकारिक भाषाएँ हिंदी और उर्दू है।

हरिद्वार का नक्शा

गूगल मैप की सहायता से निर्मित हरिद्वार का नक्शा

 

हरिद्वार के दर्शनीय स्थल

हरिद्वार पूरी तरह से गंगा जी द्वारा संरक्षित है, आप जिधर भी देखेगे आपको कही न कही गंगा जी दिखाई देंगी, परंतु यहाँ और भी दर्शनीय स्थल है जैसे हर की पौड़ी शांति कुञ्ज आश्रम मनसा देवी चंडी देवी का मंदिर माया देवी का मंदिर भारत माता का मंदिर कनखल नील धरा पक्षी विहार सप्त ऋषि आश्रम