Information and History of Meerut , Uttar Pradesh

Name Meerut
Country India
Continent Asia.
Come in existance 19th century
Previous name any mayarastra
Area in KM 141.89 km2
Area in miles 54.78 sq mi
Population 1,309,023
Population Density 9,200/km2 (24,000/sq mi)
Lat Long 28.9845° N, 77.7064° E
Name of Monuments Vidura Ka Tila, Draupadi ki Rasoi, Shahpir Meerut, Suraj Khund Temple, Vidua Ka Tila , Monuments in Meerut
Places to Visit Jain temples, St. John’s Church, Augarnath Temple, Jama Masjid, Martyr’s Memorial, Gandhi Bagh, Shahi Eid Gaah, Parikshitgarh, Dargah of Baley Miyan, Suraj Kund
Time Zone UTC+05:30
STD 91- 121
Zip Code Start 250002
Languages Hindi
Mayor Mr. Harikant Ahluwalia (BJP)
Rivers Yamuna River.
Airports B.R. Ambedkar Airport

Unknown Facts about Meerut in Hindi

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मेरठ भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक शहर है। मेरठ, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (ऍन.सी.आर) का हिस्सा है। यहाँ भारतीय सेना की एक छावनी भी है। यह उत्तर प्रदेश के सबसे तेजी से विकसित और शिक्षित होते जिलों में से एक है। सन् १९५० में यहाँ से २३ मील उत्तर-पूर्व में स्थित एक स्थल विदुर का टीला की पुरातात्विक खुदाई से ज्ञात हुआ, कि यह शहर प्राचीन नगर हस्तिनापुर का अवशेष है, जो महाभारत काल मे कौरव राज्य की राजधानी थी। एक अन्य किवंदती के अनुसार रावण के श्वसुर मय दानव के नाम पर यहाँ का नाम मयराष्ट्र पड़ा, जैसा की रामायण में वर्णित है।

Facts and Information about Pune

Information about Pune

Name Pune City
Country India
Continent  Asia
Come in existance 8th century
Previous name any punnaka
Area in KM 479 km2
Area in miles 185 sq mi
Water Area 700 km²
Population 3,124,458
Population Density 10,412 per square kilometre
Lat Long 18.5204° N, 73.8567° E
Name of Monuments Aga Khan Palace, Shindyanchi Chhatri, Parvati Hill and Temple, Lal Mahal, The Osho International Commune
Places to Visit Darshan Museum, Iskcon NVCC Temple, National Defence Academy, Sri Balaji Mandir, Malshej Ghats, Sinhagad Fort, Rajgad Fort, Narayani Dham Temple, Sarasbaug Ganpati Temple, Pu La Deshpande Garden, Ranjangaon Ganpati Temple, Katraj Jain Temple, Chaturshrungi Temple, Raja Dinkar Kelkar Museum, Phoenix Market City, Bhuleshwar Temple, Parvati Temple, Aga Khan Palace, Pataleshwar Cave Temple, Mulshi Dam, University of Pune, Seasons Mall, Torna Fort, Baneshwar Temple
Time Zone IST (UTC+5:30)
STD 20
Zip Code Start 411 002,
Languages Marathi, Hindi, English
Mayor Prashant Jagtap
Rivers Mutha river.
Airports Pune Airport

Packers and Movers Pune and Packers and Movers in Pune

Historical Facts about Pune

पुणे भारत के महाराष्ट्र राज्य का एक महत्त्वपूर्ण शहर है। यह शहर महाराष्ट्र मुला व मूठा इन दो नदियों के किनारे बसा है और पुणे जिला का प्रशासकीय मुख्यालय है। सार्वजनिक सुखसुविधा व विकास के हिसाब से पुणे महाराष्ट्र मे मुंबई के बाद अग्रसर है। अनेक नामांकित शिक्षणसंस्थायें होने के कारण इस शहर को ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ भी कहा जाता है। पुणे में अनेक प्रौद्योगिकी और ऑटोमोबाईल उपक्रम हैं, इसलिए पुणे भारत का ”डेट्राइट” जैसा लगता है।

काफी प्राचीन ज्ञात इतिहास से पुणे शहर महाराष्ट्र की ‘सांस्कृतिक राजधानी’ माना जाता है। मराठी भाषा इस शहर की मुख्य भाषा है। पुणे यह नाम ‘पुण्यनगरी’ नाम से आया समझा जाता है। यह शहर को  मे ‘पुन्नक’ (या ‘पुण्यक’) नाम से जाना जाता था, लोगो का कहना  ‘कसबे पुणे’ या ‘पुनवडी’ नाम से जाना जाने लगा। मराठा साम्राज्य के काल खंड मे शहर का नाम ‘पुणे’ मे रूप मे उपयोग मे लाया जाने लगा। ब्रिटिश ने उसे ‘पूना’ कह कर संबोधित करने की सुरुआत की। अब यह पुणे, के  नाम से जाना जाता है।

Movers and Packers Pune, Movers and Packers in Pune Wakad, Movers and Packers in Pune Hadapsar, Packers and Movers Pimple Saudagar, Packers and Movers Aundh, Packers and Movers Hinjewadi, Packers and Movers Viman Nagar, Packers and Movers Hadapsar, Packers and Movers Wakad

Facts and Information about Surat, India

Information about Surat

Name Surat
Country India
Continent Asia
Come in existance 8th century.
Previous name any Suryapur
Area in KM 326.515 km2
Area in miles 126.068 sq mi
Water Area 326.5 km²
Population 2.434 million
Population Density 1,376 per square kilometre (3,560/sq mi)
Lat Long 21.1702° N, 72.8311° E
Name of Monuments Sardar Patel Museum, Chintamani Jain Temple, Dutch Gatden, OLd Fort
Places to Visit VR Surat, ISKCON Temple, Kavi Narmad Central Library, Ambika Niketan Temple, Gopi Talav, Chintamani Jain Temple, Sarthana National Park, Siddhi Viniek Mandir, Tapi River Front, Rahul Raj Mall, Dutch Cemetery, Ichhanath Mahadev Temple, Ram madhi, Sri Shirdi Sai Temple, Hari Om Ashram kurushetra
Time Zone IST (UTC+5:30)
STD 261
Zip Code Start 395003
Languages Gujarati, Hindi, English
Mayor Ashmita Shiroya(BJP)
Rivers Tapti River
Airports Surat Airport

Historical Facts about Surat

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सूरत गुजरात प्रान्त का एक प्रमुख शहर है। यह शहर सूरत जिले का प्रशासनिक मुख्यालय भी है। तापी नदी सूरत शहर के मध्य से होकर गुजरती है। सूरत मुख्यत: कपड़ा उद्योग और डायमंड कटिंग & पोलिशिंग के लिए प्रसिद्ध है, इसलिए इस शहर को सिल्क सिटी और डायमंड सिटी के नाम से भी जाना जाता है| ऐसा समझा जाता है कि आधुनिक सूरत शहर की स्थापना पंद्रहवी सदी के अंतिम वर्षों में हुई|

कहा जाता है कि 1516 में एक हिन्दू ब्राह्मण गोपी ने इसे बसाया था। 1514 में पुर्तग़ाली यात्री दुआरते बारबोसा ने सूरत का वर्णन एक महत्त्वपूर्ण बंदरगाह के रूप में किया था। 18वीं शताब्दी में धीरे-धीरे सूरत का पतन होने लगा था। उस समय अंग्रेज़ और डच, दोनों ने सूरत पर नियंत्रण का दावा किया, लेकिन 1800 में अंग्रेज़ों का इस पर अधिकार हो गया।

Gyan Mandir Inter College, Friends Colony, Etawah, Uttar Pradesh

Gyan Mandir Inter College is located at , Friends Colony in Etawah district of Uttar Pradesh, India. It is affiliated with Uttar Pradesh Board of High School and Intermediate Education Allahabad. Gyan Mandir Inter College is a senior secondary school,.

Phone: (05688) 264515

Mobile: 9410801539

Distance from railway station – Gyan Mandir Inter College, Friends Colony is only 1.5 KM from railway Station Etawah

Distance from Roadways Bus Stand – Gyan Mandir Inter College, Friends Colony is only 2.5 KM from railway Station Etawah

Distance from Bharthana Bus Stand – Gyan Mandir Inter College, Friends Colony is only 2 KM from railway Station Etawah

Where to Stay: You can stay at Railway Station, there is so many hotels available to stay, rates are starts from 400 to 1000 INR per night

Where is Kanpur India

Kanpur is very important city of Uttar Pradesh, located at the bank of River Ganga, this city was called Manchester of India before a few decades ago, city still has so many important monuments of historical as well as industrial building.

Information about Kanpur

Name Kanpur
Country India
Continent Asia
Come in existance 1207
Previous name any Karnapur
Area in KM 403.70 km
Area in miles 155.87 sq mi
Water Area 403.7 km²
Population 2,765,348
Population Density 1,449 inhabitants per square kilometre (3,750/sq mi)
Lat Long 26.4499° N, 80.3319° E
Name of Monuments Jajmau kanpur, Massacre Ghat, Gurudwara Banno sahib, shri Radhakrishna Temple, Buddha Park, Moti Jheel Park, Nana Rao Park , Phool Bagh
Places to Visit Bithoor, Boodha Bargad, Kanpur Gardens, Shri Radhakrishna Temple, Jain Glass Temple, Allen Forest Zoo, Jajmau,
Time Zone IST (UTC+5:30)
STD 0512
Zip Code Start 208002
Languages 1. Hindi 2. English 3. Avadhi 4. Urdu
Mayor Shri Jagat Vir Singh Drona
Rivers Ganges River.
Airports Kanpur Airport

Historical facts about Kanpur

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कानपुर शहर की स्थापना सचेन्दी राज्य के राजा हिन्दू सिंह ने की थी। कानपुर का मूल नाम ‘कान्हपुर’ था। इस  नगर की उत्पत्ति का सचेंदी के राजा हिंदूसिंह ने की, इस नगर का शासन भी कन्नौज तथा कालपी के शासकों के हाथों में रहा और बाद में मुसलमान शासकों के। १७७३ की संधि के बाद यह नगर अंग्रेजों के शासन में आया, फलस्वरूप १७७८ ई. में यहाँ अंग्रेज छावनी बनी। अंग्रेजों ने यहाँ उद्योग धंधों को जन्म दिया तथा नगर के विकास का प्रारंभ हुआ। सबसे पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहाँ नील का व्यवसाय प्रारंभ किया। १८३२ में ग्रैंड ट्रंक सड़क के बन जाने पर यह नगर इलाहाबाद से जुड़ गया। १८६४ ई. में लखनऊ, कालपी आदि मुख्य स्थानों से सड़कों द्वारा जोड़ दिया गया। १८५७ के विद्रोह के बाद छावनी की सीमा नहर तथा जाजमऊ के बीच में सीमित कर दी गई; फलस्वरूप छावनी की सारी उत्तरी-पश्चिमी भूमि नागरिकों तथा शासकीय कार्य के निमित्त छोड़ दी गई। १८५७ के स्वतंत्रता संग्राम में मेरठ के साथ-साथ कानुपर भी अग्रणी रहा। नाना साहब की अध्यक्षता में भारतीय वीरों ने अनेक अंग्रेजों को मौत के घाट उतार दिया। इन्होंने नगर के अंग्रेजों का सामना जमकर किया किंतु संगठन की कमी और अच्छे नेताओं के अभाव में ये पूर्णतया दबा दिए गए शांति हो जाने के बाद विद्रोहियों को काम देकर व्यस्त रखने के लिए तथा नगर का व्यावसायिक दृष्टि से उपयुक्त स्थिति का लाभ उठाने के लिए नगर में उद्योग धंधों का विकास तीव्र गति से प्रारंभ हुआ। १८५९ ई. में नगर में रेलवे लाइन का संबंध स्थापित हुआ। इसके पश्चात् छावनी की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सरकारी चमड़े का कारखाना खुला। १८६१ ई. में सूती वस्त्र बनाने की पहली मिल खुली। क्रमश: रेलवे संबंध के प्रसार के साथ नए-नए कई कारखाने खुलते गए। द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् नगर का विकास बहुत तेजी से हुआ। यहाँ मुख्य रूप से बड़े उद्योग-धंधों में सूती वस्त्र उद्योग प्रधान था। चमड़े के कारबार का यह उत्तर भारत का सबसे प्रधान केंद्र है। ऊनी वस्त्र उद्योग तथा जूट की दो मिलों ने नगर की प्रसिद्धि को अधिक बढ़ाया है। इन बड़े उद्योगों के अतिरिक्त कानपुर में छोटे-छोटे बहुत से कारखानें हैं। प्लास्टिक का उद्योग, इंजिनियरिंग तथा इस्पात के कारखाने, बिस्कुट आदि बनाने के कारखाने पूरे शहर में फैले हुए हैं

कानपुर छावनी कानपुर नगर में ही है। सन् १७७८ ई. में अंग्रेज़ी छावनी बिलग्राम के पास फैजपुर ‘कंपू’ नामक स्थान से हटकर कानपुर आ गई। कानपुर के सन् १८४० ई. के मानचित्र से विदित होता है कि उत्तर की ओर पुराने कानपुर की पूर्वी सीमा से जाजमऊ तक गंगा के किनारे-किनारे छावनी की सीमा चली गई थी। १८५७ के विद्रोह के बाद छावनी की प्राय: सभी इमारतें नष्ट कर दी गईं। मेमोरियल चर्च, कानपुर क्लब और लाट साहब की कोठी के कारण यहाँ की रौनक कुछ बनी हुई है। छावनी का प्रबंध कैंटूनमेंट बोर्ड के सुपुर्द है जिसके कुछ चुने हुए सदस्य होते हैं।

कानपुर के दर्शनीय स्थल

नानाराव पार्क (कम्पनी बाग), चिड़ियाघर, राधा-कृष्ण मन्दिर, सनाधर्म मन्दिर, काँच का मन्दिर, श्री हनुमान मन्दिर पनकी, सिद्धनाथ मन्दिर, जाजमऊ आनन्देश्वर मन्दिर परमट, जागेश्वर मन्दिर चिड़ियाघर के पास, सिद्धेश्वर मन्दिर चौबेपुर के पास, बिठूर साँई मन्दिर, गंगा बैराज, छत्रपति साहूजी महाराज विश्वविद्यालय भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हरकोर्ट बटलर प्रौद्योगिकी संस्थान चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवँ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, ब्रह्मदेव मंदिर इत्यादि।

जाजमऊ– जाजमऊ को प्राचीन काल में सिद्धपुरी नाम से जाना जाता था। यह स्थान पौराणिक काल के राजा ययाति के अधीन था। वर्तमान में यहां सिद्धनाथ और सिद्ध देवी का मंदिर है। साथ ही जाजमऊ लोकप्रिय सूफी संत मखदूम शाह अलाउल हक के मकबरे के लिए भी प्रसिद्ध है। इस मकबरे को 1358 ई. में फिरोज शाह तुगलक ने बनवाया था। 1679 में कुलीच खान की द्वारा बनवाई गई मस्जिद भी यहां का मुख्य आकर्षण है। 1957 से 58 के बीच यहां खुदाई की गई थी जिसमें अनेक प्राचीन वस्तुएं प्राप्त हुई थी।

श्री राधाकृष्ण मंदिर-यह मंदिर जे. के. मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। बेहद खूबसूरती से बना यह मंदिर जे. के. ट्रस्ट द्वारा बनवाया गया था। प्राचीन और आधुनिक शैली से निर्मित यह मंदिर कानपुर आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रहता है। यह मंदिर मूल रूप से श्रीराधाकृष्ण को समर्पित है। इसके अलावा श्री लक्ष्मीनारायण, श्री अर्धनारीश्वर, नर्मदेश्वर और श्री हनुमान को भी यह मंदिर समर्पित है।

जैन ग्लास मंदिर-वर्तमान में यह मंदिर पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बन गया है। यह खूबसूरत नक्कासीदार मंदिर कमला टॉवर के विपरीत महेश्वरी मोहाल में स्थित है। मंदिर में ताम्रचीनी और कांच की सुंदर सजावट की गई है।

कमला रिट्रीट-कमला रिट्रीट एग्रीकल्चर कॉलेज के पश्चिम में स्थित है। इस खूबसूरत संपदा पर सिंहानिया परिवार का अधिकार है। यहां एक स्वीमिंग पूल बना हुआ है, जहां कृत्रिम लहरें उत्पन्न की जाती है। यहां एक पार्क और नहर है। जहां चिड़ियाघर के समानांतर बोटिंग की सुविधा है। कमला रिट्रीट में एक संग्रहालय भी बना हुआ है जिसमें बहुत सी ऐतिहासिक और पुरातात्विक वस्तुओं का संग्रह देखा जा सकता है। यहां जाने के लिए डिप्टी जनरल मैनेजर की अनुमति लेना अनिवार्य है।

फूल बाग-फूल बाग को गणेश उद्यान के नाम से भी जाना जाता है। इस उद्यान के मध्य में गणेश शंकर विद्यार्थी का एक मैमोरियल बना हुआ है। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद यहां ऑथरेपेडिक रिहेबिलिटेशन हॉस्पिटल बनाया गया था। यह पार्क शहर के बीचों बीच मॉल रोड पर बना है।

एलेन फोरस्ट ज़ू-1971 में खुला यह चिड़ियाघर देश के सर्वोत्तम चिड़ियाघरों में एक है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह देश का तीसरा सबसे बड़ा चिड़ियाघर है और यहाँ 1250 जानवर हैं। कुछ समय पिकनिक के तौर पर बिताने और जीव-जंतुओं को देखने के लिए यह चिड़ियाघर एक बेहतरीन जगह है। इस चिड़ियाघर में मिनी ट्रेन और विधुत रिक्शा भी चलता है।[2]

कानपुर मैमोरियल चर्च-1875 में बना यह चर्च लोम्बार्डिक गोथिक शैली में बना हुआ है। यह चर्च उन अंग्रेज़ों को समर्पित है जिनकी 1857 के विद्रोह में मृत्यु हो गई थी। ईस्ट बंगाल रेलवे के वास्तुकार वाल्टर ग्रेनविले ने इस चर्च का डिजाइन तैयार किया था।

नाना राव पार्क-नाना राव पार्क फूल बाग से पश्चिम में स्थित है। 1857 में इस पार्क में बीबीघर था। आज़ादी के बाद पार्क का नाम बदलकर नाना राव पार्क रख दिया गया।

जेड स्क़ुअरे माल-वर्तमान मे यह जगह शहर का सबसे बड़ा आकर्शन का केन्द्र है | यहा पे कई सारी खाने पीने और् खरीदारी के शोरूम है |

Information and Facts about Muzaffarpur

Information about Muzaffarpur

Name Muzaffarpur
Country India
Continent Asia
Come in existance 1875
Previous name any Muzaffar Khan
Area in KM 3,172 km2
Area in miles 1,225 sq mi
Water Area 3,172 km²
Population 393,724
Population Density 1,181 people per sq. km.
Lat Long 26.1209° N, 85.3647° E
Name of Monuments Baba Garibnath Temple, Rajkhand, Jubba Sahni Park, Ramna Devi Mandir, Shri Ram Temple, Kali Mata Temple,
Places to Visit Garib Sthan Mandir Temple, Litchi Gardens, Jubba Sahni Park, Ramna Devi Mandir, Kali Mata Temple, Shri Ram Temple, Simri Mai Temple, Ambara Chowk
Time Zone IST (UTC+5:30)
STD 621
Zip Code Start 842001
Languages Hindi, English, Maithili, Bajjika, Urdu
Mayor Varsha Singh
Rivers Bagmati River
Airports Muzaffarpur Airport

Historical Facts about Muzaffarpur in Hindi
मुजफ्फरपुर उत्तरी बिहार राज्य के सबसे बड़े शहर का मुख्यालय तथा मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले का प्रमुख नगर एवं मुख्यालय है। अपने सूती वस्त्र उद्योग तथा आम और लीची जैसे फलों के उम्दा उत्पादन के लिये यह जिला पूरे विश्व में जाना जाता है। यहाँ तक भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक को यहाँ से लिच्ची भेजी जाती है। उत्तर में पूर्वी चंपारण और सीतामढ़ी या सीतामढी, दक्षिण में वैशाली और सारण, पूर्व में समस्तीपुर और दरभंगा तथा पश्चिम में गोपालगंज से मुजफ्फरपुर जिला घिरा है। बज्जिका यहाँ की बोली और हिन्दी तथा उर्दू यहाँ की मुख्य भाषाएँ हैं। मिथिला के राजा जनक के समय तिरहुत प्रदेश मिथिला का अंग था। बाद में राजनैतिक शक्ति विदेह से वैशाली की ओर हस्तांतरित हुआ। तीसरी सदी में भारत आए चीनी यात्री ह्वेनसांग के यात्रा विवरणों से यह पता चलता है कि यह क्षेत्र काफी समय तक महाराजा हर्षवर्धन के शासन में रहा। उनकी मृत्यु के बाद स्थानीय क्षत्रपों का कुछ समय शासन रहा तथा आठवीं सदी के बाद यहाँ बंगाल के पाल वंश के शासकों का शासन शुरु हुआ जो 1019 तक जारी रहा। तिरहुत पर लगभग 11 वीं सदी मे चेदि वंश का भी कुछ समय शासन रहा। सन 1211 से 1226 बीच गैसुद्दीन एवाज़ तिरहुत का पहला मुसलमान शासक बना। चम्पारण के सिमराँव वंश के शासक हरसिंह देव के समय 1323 ईस्वी में तुग़लक वंश के शासक गयासुद्दीन तुग़लक ने इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया लेकिन उसने सत्ता मिथिला के शासक कामेश्वर ठाकुर को सौंप दी। चौदहवीं सदी के अंत में तिरहुत समेत पूरे उत्तरी बिहार का नियंत्रण जौनपुर के राजाओं के हाथ में चला गया जो तबतक जारी रहा जबतक दिल्ली सल्तनत के सिकन्दर लोदी ने जौनपुर के शासकों को हराकर अपना शासन स्थापित नहीं किया। इसके बाद विभिन्न मुग़ल शासकों और बंगाल के नवाबों के प्रतिनिधि इस क्षेत्र का शासन चलाते रहे। पठान सरदार दाऊद खान को हराने के बाद मुगलों ने नए बिहार प्रांत का गठन किया जिसमें तिरहुत को शामिल कर लिया गया।
1764 में बक्सर की लडाई के बाद यह क्षेत्र सीधे तौर पर अंग्रेजी हुकूमत के अधीन हो गया। सन 1875 में प्रशासनिक सुविधा के लिये तिरहुत का गठन कर मुजफ्फरपुर जिला बनाया गया। मुजफ्फरपुर ने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में अत्यंत महत्वपूरण भूमिका निभाई है। महात्मा गाँधी की दो यात्राओं ने इस क्षेत्र के लोगों में स्वाधीनता के चाह की नयी जान फूँकी थी। खुदीराम बोस तथा जुब्बा साहनी जैसे अनेक क्रांतिकारियों की यह कर्मभूमि रही है। 1930 के नमक आन्दोलन से लेकर 1942 के भारत छोडो आन्दोलन के समय तक यहाँ के क्रांतिकारियों के कदम लगातार आगे बढ़ते रहे। मुजफ्फरपुर का वर्तमान नाम ब्रिटिस काल के राजस्व अधिकारी मुजफ्फर खान के नाम पर पड़ा है। 1972 तक मुजफ्फरपुर जिले में शिवहर, सीतामढी तथा वैशाली जिला शामिल था। मुजफ्फरपुर को इस्लामी और हिन्दू सभ्यताओं की मिलन स्थली के रूप में भी देखा जाता रहा है। दोनों सभ्यताओं के रंग यहाँ गहरे मिले हुये हैं और यही इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी है।

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Information and Facts about Bhagalpur, Bihar

Information about Bhagalpur

Name Bhagalpur
Country India
Continent Asia
Come in existance
Previous name any Bhagdatpuram
Area in KM 110 km2
Area in miles 40 sq mi
Water Area 110 km²
Population 410,210
Population Density 1,180 inhabitants per square kilometre (3,100/sq mi)
Lat Long 25.3478° N, 86.9824° E
Name of Monuments Vikramshila, Mount Mandar, Colganj Rock Cut Temple, Sultanganj, Kuppa Ghat
Places to Visit Mandar Hills, Ghuran Peer Baba, Vaasupujya Bhagwan Mahavir Jain Mandir, Ancient Vikramsila University, Bhikhanpur, Colganj Rock Cut Temples, Burhanath Temple, Ajgaibinath Temple,
Time Zone IST (UTC+5:30)
STD 641
Zip Code Start 812001
Languages Angika, Hindi
Mayor Deepak Bhuwania
Rivers Ganges
Airports Bhagalpur Airport

 

Historical Facts about Bhagalpur in Hindi

भागलपुर बिहार प्रान्त का एक शहर है। गंगा के तट पर बसा यह एक अत्यंत प्राचीन शहर है। पुराणों में और महाभारत में इस क्षेत्र को अंग प्रदेश का हिस्सा माना गया है। भागलपुर के निकट स्थित चम्पानगर महान पराक्रमी शूरवीर कर्ण की राजधानी मानी जाती रही है।भागलपुर सिल्क के व्यापार के लिये विश्वविख्यात रहा है,पवित्र् गंगा नदी को जाह्नवी के नाम से भी जाना जाता है। जिस स्‍थान पर गंगा को यह नाम दिया गया उसे अजगैवी नाथ कहा जाता है यह तीर्थ भी भागलपुर में ही है। बिहार के गौरवशाली इतिहास में भागलपुर एक नगीने की तरह है।

इतिहास में झांकें तो हम पाते हैं बीते समय में भागलपुर भारत के दस बेहतरीन शहरों में से एक था। आज का भागलपुर सिल्‍क नगरी के रूप में ज्‍यादा जाना जाता है। इसका इतिहास काफी पुराना है। भागलपुर को (ईसा पूर्व 5वीं सदी) चंपावती के नाम से जाना जाता था। यह वह काल था जब गंगा के मैदानी क्षेत्रों में भारतीय सम्राटों का वर्चस्‍व बढ़ता जा रहा था। अंग 16 महाजनपदों में से एक था जिसकी राजधानी चंपावती थी।

अंग महाजनपद को पुराने समय में मलिनी, चम्‍पापुरी, चम्‍पा मलिनी, कला मलिनी आदि आदि के नाम से जाना जाता था।जबकि कर्ण पर्व में अंग को एक ऐसे प्रदेश के रूप में जाना जाता था जहां पत्‍नी और बच्‍चों को बेचा जाता है। वहीं दूसरी ओर महाभारत में अंग (चम्‍पा) को एक तीर्थस्‍थल के रूप में पेश किया गया है। इस ग्रंथ के अनुसार अंग राजवंश का संस्‍थापक राजकुमार अंग थे। जबकि रामयाण के अनुसार यह वह स्‍थान है जहां कामदेव ने अपने अंग को काटा था।

 

भागलपुर के मुख्य आकर्षण

मंदार पहाड़ी-

यह पहाड़ी भागलपुर से 48 किलोमीटर की दूरी पर है, जो अब बांका जिले मे स्थित है। इसकी ऊंचाई 800 फीट है। इसके संबंध में कहा जाता है कि इसका प्रयोग सागर मंथन में किया गया था। किंवदंतियों के अनुसार इस पहाड़ी के चारों ओर अभी भी शेषनाग के चिन्‍ह को देखा जा सकता है, जिसको इसके चारों ओर बांधकर समुद्र मंथन किया गया था। कालिदास के कुमारसंभवम में पहाड़ी पर भगवान विष्‍णु के पदचिन्‍हों के बारे में बताया गया है। इस पहाड़ी पर हिन्‍दू देवी देवताओं का मंदिर भी स्थित है।

विक्रशिला विश्‍वविद्यालय

-विक्रमशिला विश्‍वविद्यालय नालन्‍दा के समकक्ष माना जाता था। इसका निर्माण पाल वंश के शासक धर्मपाल  ने करवाया था। धर्मपाल ने यहां की दो चीजों से प्रभावित होकर इसका निर्माण कराया था। पहला, यह एक लोकप्रिय तांत्रिक केंद्र था जो कोसी और गंगा नदी से घिरा हुआ था। यहां मां काली और भगवान शिव का मंदिर भी स्थित है।

कहलगांव

-यहां तीन छोटे-छोटे टापू हैं। कहा जाता है कि जाह्नु ऋषि के तप में गंगा की तीव्र धारा से यहीं पर व्‍यवधान पड़ा था। इससे क्रो‍धित होकर ऋषि ने गंगा को अपनी जांघ में कर लिया था। बाद में राजा भागीरथ के प्रार्थना के उपरांत उन्‍होंने गंगा को छोड़ दिया। इसके बाद से गंगा की धाराएं बदल गई और यह दक्षिण से उत्‍तर की ओर गमन करने लगी। एक मात्र पत्‍थर पड़ बना हुआ मंदिर भी देखने लायक है।

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Bhagalpur News in Hindi

Information about BhagalpurAll information about Bhagalpur

 

 

Information and Facts about Gaya, India

Information about Gaya

Name Gaya
Country India
Continent Asia
Come in existance 1787
Previous name any Daegaya
Area in KM 90.17 km2
Area in miles 34.81 sq mi
Water Area 90.17 km²
Population 470,839
Population Density 9,482/km2 (24,560/sq mi)
Lat Long 24.7955° N, 84.9994° E
Name of Monuments Mahabodhi Temple, Vishnupad Temple, Dungeshwari Cave Temples, Barabar Caves, Bodhi Tree, Chinese Temple And Monastery
Places to Visit Mahabodhi Temple, Vishnupad Temple, Dungeshwari Cave Temples, Barabar Caves, Bodhi Tree, Chinese Temple And Monastery, Bodhgaya Archaeological Museum, Muchalinda Lake, Thai Temple And Monastery, Royal Bhutan Monastery
Time Zone IST (UTC+5:30)
STD 91-631
Zip Code Start 823001
Languages Hindi, English, Urdu
Mayor Soni Kumari
Rivers Ganga
Airports Gaya International Airport

Historical facts of Gaya in Hindi

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गया, झारखंड और बिहार के फल्गु नदी के तट पर बसा भारत के बिहार राज्य का दूसरा बड़ा शहर है। वाराणसी की तरह गया की प्रसिद्धि मुख्य रुप से एक धार्मिक नगरी के रुप में है। पितृपक्ष के अवसर पर यहाँ हजारों श्रद्धालु पिंडदान के लिये जुटते हैं। गया सड़क, रेल और वायु मार्ग द्वारा पूरे भारत से जुड़ा है। नवनिर्मित गया अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा  है। गया से 17 किलोमीटर की दूरी पर बोधगया स्थित है जो बौद्ध तीर्थ स्थल है और यहीं बोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

गया बिहार के महत्वपूर्ण तीर्थस्थानों में से एक है। यह शहर खासकर हिन्दू तीर्थयात्रियों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां का विष्णुपद मंदिर पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। दंतकथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के पांव के निशान पर इस मंदिर का निर्माण कराया गया है। हिन्दू धर्म में इस मंदिर को अहम स्थान प्राप्त है। गया पितृदान के लिए भी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यहां फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करने से मृत व्यक्ति को बैकुण्ठ की प्राप्ति होती है। लोगो का मानना है कि गयासुर नामक दैत्य का बध करते समय भगवान विष्णु के पद चिह्न यहां पड़े थे जो आज भी विष्णुपद मंदिर में देखने को मिलते हैं।

गया मौर्य काल में एक महत्वपूर्ण नगर था। खुदाई के दौरान सम्राट अशोक से संबंधित आदेश पत्र पाया गया है। मध्यकाल में यह शहर मुगल सम्राटों के अधीन था। मुगलकाल के पतन के उपरांत गया पर अनेक क्षेत्रीय राजाओं ने राज किया। 1787 में होल्कर वंश की साम्राज्ञी महारानी अहिल्याबाई ने विष्णुपद मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था।

गया के दर्शनीय स्थल

विष्णुपद मंदिर-फल्गु नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित यह मंदिर 30 मीटर ऊंचा है जिसमें आठ खंभे हैं। इन खंभों पर चांदी की परतें चढ़ाई हुई है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु के 40 सेंटीमीटर लंबे पांव के निशान हैं। इस मंदिर का 1787 में इंदौर की महारानी अहिल्या बाई ने नवीकरण करवाया था।

जामा मस्जिद– बिहार की सबसे बडी मस्जिद है। यह तकरीबन २०० साल पुरानी है। इसमे हजारो लोग साथ नमाज अदा कर सकते हैं।

बानाबर पहाड़-गया से लगभग २० किलोमीटर उत्तर बेलागंज से १० किलोमीटर पूरब मे स्थित है। इसके ऊपर भगवान शिव का मन्दिर है, जहाँ हर वर्ष हजारों श्रद्धालू सावन के महीने मे जल चढ़ते है। कहते हैं इस मन्दिर को बानासुर ने बनवाया था। पुनः सम्राट अशोक ने मरम्मत करवाया। इसके नीचे सतघरवा की गुफा है, जो प्राचीन स्थापत्य कला का नमूना है।

प्राचीन एबं अद्भुत शिव मंदिर-चोवार गया शहर से 35 किलोमीटर पूर्व में एक गॉव है चोवार जो की अपने आप में एक बहुत ही अद्भुत है इस गॉव में एक बहुत ही प्राचीन शिव मंदिर है जहा सैकड़ो सर्धालू बाबा बालेश्वरनाथ के ऊपर जल चढाते है पर आजतक ये जल कहाँ जाता है कुछ पता नहीं चलता है इसके पीछे के कारन किसी को नहीं पता चला लगभग हजारो सालों से ये चमत्कार की जाँच करने आये सैकड़ो बैज्ञानिको ने भी ये दाबा किया है की ये भगवान शिव का चमत्कार है। और इसी गॉव में कुछ सालों पहले सड़क निर्माण के दौरान यहाँ एक बहुत ही बड़ा घड़ा निकला जिसमे हजारो शुद्ध चाँदी के सिक्के निकले थे! और आज भी इस गॉव से अष्टधातु की अनेको मूर्तियाँ है जो की, आज भी शिव मंदिर में देखने को मिलता है। इस गॉव में एक ताड़ का पेड़ भी है जो इस चोवार गॉव की शोभा बढ़ाता है इसमे खास बात तो ये है की,ये ताड़ का पेड़ एक, दो, नहीं बल्कि पुरे तिन डाल का पेड़ है जो की भगवान शिव की त्रिशूल की आकार का है! दूर-दूर से लोग इस पेड़ को देखने के लिये आते हैं।

कोटेस्वरनाथ-यह अति प्राचीन शिव मन्दिर मोरहर नदी के किनारे मेन गाँव में स्थित है। यहाँ हर वर्ष शिवरात्रि में मेला लगता है। यहाँ पहुँचने हेतु गया से लगभग ३० किमी उत्तर पटना-गया मार्ग पर स्थित मखदुमपुर से पाईबिगहा समसारा होते हुए जाना होता है। गया से पाईबिगहा के लिये सीधी बस सेवा उपलब्ध है।

सूर्य मंदिर-सूर्य मंदिर प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर के 20 किलोमीटर उत्तर और रेलवे स्टेशन से 3 किलोमीटर दूर स्थित है। भगवान सूर्य को समर्पित यह मंदिर सोन नदी के किनारे स्थित है। दिपावली के छ: दिन बाद बिहार के लोकप्रिय पर्व छठ के अवसर पर यहां तीर्थयात्रियों की जबर्दस्त भीड़ होती है। इस अवसर पर यहां मेला भी लगता है।

ब्रह्मयोनि पर्वत-इस पहाड़ी की चोटी पर चढ़ने के लिए ४४० सीढ़ियों को पार करना होता है। इसके शिखर पर भगवान शिव का मंदिर है। यह मंदिर विशाल बरगद के पेड़ के नीचे स्थित हैं जहां पिंडदान किया जाता है। इस स्थान का उल्लेख रामायण में भी किया गया है। दंतकथाओं पर विश्‍वास किया जाए तो पहले फल्गु नदी इस पहाड़ी के ऊपर से बहती थी। लेकिन देवी सीता के शाप के प्रभाव से अब यह नदी पहाड़ी के नीचे से बहती है। यह पहाड़ी हिन्दुओं के लिए काफी पवित्र तीर्थस्थानों में से एक है। यह मारनपुर के निकट है।

मंगला गौरी-मंगला गौरी पहाड पर स्तिथ यह मंदिर मां शक्ति को समर्पित है। यह स्थान १८ माहा शक्ति पिथों मैं से एक है। माना जाता है कि जो भी यहां पुजा कराते हैं उन्कि मन कि इच्छा पुरि होति है। इसी मन्दिर के परिवेश मैं मां काली, गणेश, हनुमान तथा भगवान शिव के भी मन्दिर स्तिथ हैं।

बराबर गुफा-यह गुफा गया से 20 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। इस गुफा तक पहुंचने के लिए 7 किलोमीटर पैदल और 10 किलोमीटर रिक्शा या तांगा से चलना होता है। यह गुफा बौद्ध धर्म के लिए महत्वपूर्ण है। यह बराबर और नागार्जुनी श्रृंखला के पहाड़ पर स्थित है। इस गुफा का निर्माण बराबर और नागार्जुनी पहाड़ी के बीच सम्राट अशोक और उनके पोते दशरथ के द्वारा की गई है। इस गुफा उल्लेख ई॰एम. फोस्टर की किताब ए पैसेज टू इंडिया में भी किया गया है। इन गुफओं में से 7 गुफाएं भारतीय पुरातत्व विभाग की देखरख में है।

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Gaya News in Hindi

Information and Facts about Patna, India

Information about Patna

Name Patna
Country India
Continent Asia
Come in existance 1825
Previous name any Pataliputra,
Area in KM 99.45 km
Area in miles 38.40 sq mi
Water Area 3,202 km²
Population 1,683,200
Population Density 16,925/km2 (43,840/sq mi)
Lat Long 25.5941° N, 85.1376° E
Name of Monuments Har Mandir Takht, Raj Bhavan, Nalanda University, Patna Museum, Gandhi Museum,
Places to Visit Hanuman Mandir, Nalanda, Takht Sri Patna Sahib, Buddha Smriti Park, Sanjay Gandhi Biological Park, Golghar, Patna Museum, Takhat Shri Harimandirji Patna Sahib, Gandhi Maidan, Eco Park, Pavapuri Jain Temple, P&M Mall, Gandhi Ghat Near Nit Patna, Patan Devi Temple, Shahid Smarak, Srikrishna Science Centre, Jalmandir Temple, Mahatma Gandhi Setu, Patna Planetarium, Kali Mandir-Darbhanga House , ISKCON Temple Patna, Funtasia Island, Maner Sharif, Martyr’s Memorial, Kargil Chowk
Time Zone IST (UTC+5:30)
STD 91-612
Zip Code Start 800 XXX
Languages Hindi, English, Magadhi
Mayor Afzal Imam
Rivers Ganges
Airports Lok Nayak Jayaprakash Airport

 

Historical Facts of Patna in Hindi

प्राचीन पटना (पूर्वनाम- पाटलिग्राम या पाटलिपुत्र) सोन और गंगा नदी के संगम पर स्थित था। सोन नदी आज से दो हजार वर्ष पूर्व अगमकुँआ से आगे गंगा मे मिलती थी। पाटलिग्राम मे गुलाब (पाटली का फूल) काफी मात्रा में उपजाया जाता था। गुलाब के फूल से तरह-तरह के इत्र, दवा आदि बनाकर उनका व्यापार किया जाता था इसलिए इसका नाम पाटलिग्राम हो गया। लोककथाओं के अनुसार, राजा पत्रक को पटना का जनक कहा जाता है। उसने अपनी रानी पाटलि के लिये जादू से इस नगर का निर्माण किया। इसी कारण नगर का नाम पाटलिग्राम पड़ा। पाटलिपुत्र नाम भी इसी के कारण पड़ा। संस्कृत में पुत्र का अर्थ बेटा तथा ग्राम का अर्थ गांव होता है।

२५०० वर्षों से अधिक पुराना शहर होने का गौरव दुनिया के बहुत कम नगरों को हासिल है। बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध अपने अन्तिम दिनों में यहाँ से होकर गुजरे थे। उनकी यह भविष्यवाणी थी कि नगर का भविष्य उज्जवल होगा, बाढ़ या आग के कारण नगर को खतरा बना रहेगा। आगे चल कर के महान नन्द शासकों के काल में इसका और भी विकास हुआ एवं उनके बाद आने वाले शासकों यथामौर्य साम्राज्य के उत्कर्ष के बाद पाटलिपुत्र भारतीय उपमहाद्वीप में सत्ता का केन्द्र बन गया। चन्द्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य बंगाल की खाड़ी से अफ़गानिस्तान तक फैल गया था। मौर्य काल के आरंभ में पाटलिपुत्र के अधिकांश राजमहल लकड़ियों से बने थे, पर सम्राट अशोक ने नगर को शिलाओं की संरचना में तब्दील किया। चीन के फाहियान ने, जो कि सन् 399-414 तक भारत यात्रा पर था, अपने
पुस्तक मे इस शहर के विषय मे एवं यहां के लोगों के बारे मे भी विशद विवरण दिया है जो आज भी भारतीय इतिहास के छात्रों के लिए सन्दर्भ के रूप मे काम आता है। शीघ्र ही पाटलीपुत्र ज्ञान का भी एक केन्द्र बन गया। बाद में, ज्ञान की खोज में कई चीनी यात्री यहाँ आए और उन्होने भी यहां के बारे में अपने यात्रा-वृतांतों में बहुत कुछ लिखा है। मौर्यों के पश्चात कण्व एवं शुंगो सहीत अनेक शासक आये लेकिन इस नगर का महत्व कम नही हुआ।

इसके पश्चात नगर पर गुप्त वंश सहित कई राजवंशों का राज रहा। इन राजाओं ने यहीं से भारतीय उपमहाद्वीप पर शासन किया। गुप्त वंश के शासनकाल को प्राचीन भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है। पर लगातार होने वाले हुणो के आक्रमण एवं गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद इस नगर को वह गौरव नहीं मिल पाया जो एक समय मौर्य वंश या गुप्त वंश के समय प्राप्त था।

गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद पटना का भविष्य काफी अनिश्चित रहा। 12 वीं सदी में बख़्तियार खिलजी ने बिहार पर अपना अधिपत्य जमा लिया और कई आध्यात्मिक प्रतिष्ठानों को ध्वस्त कर डाला। इस समय के बाद पटना देश का सांस्कृतिक और राजनैतिक केन्द्र नहीं रहा। मुगलकाल में दिल्ली के सत्ताधारियों ने अपना नियंत्रण यहाँ बनाए रखा। इस काल में सबसे उत्कृष्ठ समय तब आया जब शेरशाह सूरी ने नगर को पुनर्जीवित करने की कोशिश की। उसने गंगा के तीर पर एक किला बनाने की सोची। उसका बनाया कोई दुर्ग तो अभी नहीं है, पर अफ़ग़ान शैली में बना एक मस्जिद अभी भी है।

मुगल बादशाह अकबर की सेना 1574 ईसवी में अफ़गान सरगना दाउद ख़ान को कुचलने पटना आया। अकबर के राज्य सचिव एवं आइने-अकबरी के लेखक अबुल फ़जल ने इस जगह को कागज, पत्थर तथा शीशे का सम्पन्न औद्योगिक केन्द्र के रूप में वर्णित किया है। पटना राइस के नाम से यूरोप में प्रसिद्ध चावल के विभिन्न नस्लों की गुणवत्ता का उल्लेख भी इन विवरणों में मिलता है।

शताब्दी में पटना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का केन्द्र बन गया। अंग्रेज़ों ने 1620 में रेशम तथा कैलिको के व्यापार के लिये यहाँ फैक्ट्री खोली। जल्द ही यह सॉल्ट पीटर (पोटेशियम नाइट्रेट) के व्यापार का केन्द्र बन गया जिसके कारण फ्रेंच और डच लोग से प्रतिस्पर्धा तेज हुई। बक्सर के निर्णायक युद्ध के बाद नगर इस्ट इंडिया कंपनी के अधीन चला गया और वाणिज्य का केन्द्र बना रहा।

पटना के दर्शनीय स्थल

    अगम कुआँ – मौर्य वंश के शासक सम्राट अशोक के काल का एक कुआँ गुलजा़रबाग स्टेशन के पास स्थित है। पास ही स्थित एक मन्दिर स्थानीय लोगों के शादी-विवाह का मह्त्वपूर्ण स्थल है।

    कुम्रहार – चंद्रगुप्त मौर्य, बिन्दुसार तथा अशोक कालीन पाटलिपुत्र के भग्नावशेष को देखने के लिए यह सबसे अच्छी जगह है। कुम्रहार परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित तथा संचालित है और सोमवार को छोड़ सप्ताह के हर दिन १० बजे से ५ बजे तक खुला रहता है।

    बेगू हज्जाम की मस्जिद सन् 1489 में बंगाल के शासक अलाउद्दीन शाह द्वारा निर्मित.

पत्थर की मस्जिद – जहाँगीर के पुत्र शाह परवेज़ द्वारा 1621 में निर्मित यह छोटी सी मस्जिद अशोक राजपथ पर सुलतानगंज में स्थित है।

    शेरशाह की मस्जिद अफगान शैली में बनी यह मस्जिद बिहार के महान शासक शेरशाह सूरी द्वारा 1540-1545 के बीच बनवाई गयी थी। पटना में बनी यह सबसे बड़ी मस्जिद है।

    पादरी की हवेली – सन 1772 में निर्मित बिहार का प्राचीनतम चर्च बंगाल के नवाब मीर कासिम तथा ब्रिटिस ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच की कड़वाहटों का गवाह है।।

ख़ुदाबख़्श लाईब्रेरी अशोक राजपथ पर स्थित यह राष्ट्रीय पुस्तकालय 1891 में स्थापित हुआ था। यहाँ कुछ अतिदुर्लभ मुगल कालीन पांडुलपियां हैं।

क़िला हाउस (जालान हाउस) दीवान बहादुर राधाकृष्ण जालान द्वारा शेरशाह के किले के अवशेष पर निर्मित इस भवन में हीरे जवाहरात तथा चीनी वस्तुओं का एक निजी संग्रहालय है।

तख्त श्रीहरमंदिर पटना सिखों के दसमें और अंतिम गुरु गोविन्द सिंह की जन्मस्थली है। नवम गुरु श्री तेगबहादुर के पटना में रहने के दौरान गुरु गोविन्दसिंह ने अपने बचपन के कुछ वर्ष पटना सिटी मे बिताए थे। बालक गोविन्दराय के बचपन का पंगुरा (पालना), लोहे के चार तीर, तलवार, पादुका तथा ‘हुकुमनामा’ यहाँ गुरुद्वारे में सुरक्षित है। यह स्थल सिक्खों के लिए अति पवित्र है।

महावीर मन्दिर संकटमोचन रामभक्त हनुमान मन्दिर पटना जंक्शन के ठीक बाहर बना है। न्यू मार्किट में बने मस्जिद के साथ खड़ा यह मन्दिर हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है।

गांधी मैदान वर्तमान शहर के मध्यभाग में स्थित यह विशाल मैदान पटना का दिल है। जनसभाओं, सम्मेलनों तथा राजनीतिक रैलियों के अतिरिक्त यह मैदान पुस्तक मेला तथा दैनिक व्यायाम का भी केन्द्र है। इसके चारों ओर अति महत्वपूर्ण सरकारी इमारतें और प्रशासनिक तथा मनोरंजन केंद्र बने हैं।

गोलघर 1770 ईस्वी में इस क्षेत्र में आए भयंकर अकाल के बाद अनाज भंडारण के लिए बनाया गया यह गोलाकार ईमारत अपनी खास आकृति के लिए प्रसिद्ध है। 1786 ईस्वी में जॉन गार्स्टिन द्वारा निर्माण के बाद से गोलघ‍र पटना शहर क प्रतीक चिह्न बन गया। दो तरफ बनी सीढियों से ऊपर जाकर पास ही बहनेवाली गंगा और इसके परिवेश का शानदार अवलोकन संभव है।

गाँधी संग्रहालय गोलघर के सामने बनी बाँकीपुर बालिका उच्च विद्यालय के बगल में महात्मा गाँधी की स्मृतियों से जुड़ी चीजों का नायाब संग्रह देखा जा सकता है। हाल में इसी परिसर में नवस्थापित चाणक्य विधि विश्वविद्यालय का अध्ययन केंद्र भी अवलोकन योग्य है।

श्रीकृष्ण विज्ञान केंद्र गाँधी मैदान के पश्चिम भाग में बना विज्ञान परिसर स्कूली शिक्षा में लगे बालकों के लिए ज्ञानवर्धक केंद्र है।

पटना संग्रहालय जादूघर के नाम से भी जानेवाले इस म्यूज़ियम में प्राचीन पटना के हिन्दू तथा बौद्ध धर्म की कई निशानियां हैं। लगभग ३० करोड़ वर्ष पुराने पेड़ के तने का फॉसिल यहाँ का विशेष धरोहर है।

संजय गांधी जैविक उद्यान – राज्यपाल के सरकारी निवास राजभवन के पीछे स्थित जैविक उद्यान शहर का फेफड़ा है। विज्ञानप्रेमियों के लिए ‌यह जन्तु तथा वानस्पतिक गवेषणा का केंद्र है। व्यायाम करनेवालों तथा पिकनिक के लिए यह् पसंदीदा स्थल है।

महावीर मंदिर से पटना शहर का दृश्य

दरभंगा हाउस इसे नवलखा भवन भी कहते हैं। इसका निर्माण दरभंगा के महाराज कामेश्वर सिंह ने करवाया था। गंगा के तट पर अवस्थित इस प्रासाद में पटना विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभागों का कार्यालय है। इसके परिसर में एक काली मन्दिर भी है जहां राजा खुद अर्चना किया करते थे।

Where is Shanghai

Shanghai is Located in the Yangtze River Delta in East China, at the elevation of meter from sea level with coordinates or lat long 31°13′43″N 121°28′29″E, nearest airport i.e Shanghai Pudong International Airport, North-West of the city center in a distance is 49.2 k/m, Shanghai shared its border with Hangzhou, Suzhou, Nanjing, Shaoxing and Wuzhen as this city is divided ib two parts by Huangpu River.

Corona Virus is born from the Wuhan (Know Where is Wuhan) city of Hubei (Know Where is Hubei) Province of china, so you also want to know the name of Coronavirus Affected Counties

Where is Shanghai located in China

Know where is Shanghai located in China on Google Map

 

Information about Shanghai

Name Shanghai
Country China
Continent Asia
Came in existence 7 Jul 1927 [as Municipality]
Previous name any Huating (751 AD)
Area in KM 6,340.5 km2
Area in miles 2,448.1 sq mi
Population 24,152,700 (2015)
Population Density 3,800/km2 (9,900/sq mi)
Lat Long 31°13′43″N 121°28′29″E
Name of Monuments Zhongshan Park, Temple of the Town God
Places to Visit Shanghai World Financial Center, Shanghai Circus World, Yu Garden, Shanghai History Museum, Jin Mao Tower, Longhua Temple, Fuxing Park, Jade Buddha Temple, Zhujiajiao Ancient Town, Jing’an Temple
Time Zone (UTC+8)
STD Code +86-21
Zip Code Start 200000–202100
Languages Mandarin, Chinese, Shanghainese
Mayor Yang Xiong
Transportation Taxi, Car, City bus, Airbus, Rail
Rivers Huangpu River
Lakes Dianshan lake
Mountains Na
Airports Pudong International Airport