हिसार हरियाणा

हिसार, दिल्ली के निकटम राज्य हरियाणा का एक जिला और शहर है, यहाँ की जलवायु शुष्क है, गर्मियों में गर्म और सर्दियो म ठंडी रहती है, यहाँ पर घाघर और यमुना नदी बहती है, हिसार कपास की खेती और सांडों के लिए विश्विख्यात है।

हिसार के बारे मे जानकारी

हिसार का पृथ्वीतल समुद्रतल से २१५ मीटर है, यहाँ का अक्षांश और देशांतर २९ डिग्री ९ मिनट उत्तर से ७५ डिग्री ४२ मिनट पूर्व तक है, हिसार का क्षेत्रफल ३७८७ वर्ग किलोमीटर है, जनसँख्या ३०१२४९ और जनसँख्या घनत्व ४३८ व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, यहाँ पर साक्षरता ८१% है और महिला पुरुष अनुपात ८४४ महिलाये प्रति १००० पुरुषो पर है.

जनसंख्या के हिसाब से हिसार भारत में १४१वे नम्बर है और यहाँ पर महिला और पुरुष जनसंख्या का अनुपात ४६५ और ५४% है, महिलाओ के साक्षरता ७५% और पुरुषो की ८१% है।

हिसार में लोकसभा क्षेत्र हिसार है और विधानसभा क्षेत्र हिसार सिटी है, हिसार का पिन कोड १२३ से शुरू होता है और हिसार का एसटीडी कोड ०१६६२ है, हिसार में वाहनों के पंजीकरण हरियाणा २० और ३९ (व्यावसायिक) है, हिसार में हिन्दू, सिख,जैन, मुस्लिम और ईसाई सभी लोग है, किताबी आंकड़ो के हिसाब से हिन्दू ज्यादा है, यहाँ पर बोली जाने वाली भासाओ में हिंदी, पंजाबी, उर्दू, हरयानवी और अंग्रेजी है।

हिसार का नक्शा

हिसार का मानचित्र गूगल मैप पर

हिसार का इतिहास

हिसार का इतिहास बहुत प्राचीन है, इसका भी सम्बन्ध महाभारत काल से है, क्योंकि इस क्षेत्र का वरन पाणिनि के महान ग्रन्थ अष्टाध्यायी में भी है, जिससे प्रतीत होता है की हिसार का इतिहास गरिमामय और भव्य है, परंतु अष्टाध्यायी में इसका नाम इषुकार वर्णित है जिसे इतिहासकारो ने भी हिसार का प्राचीन नाम माना है और हिसार को इषुकार का अपभ्रंस माना गया गया है।

हिसार पर तीसरी शताब्दी में मौर्य वंश का अधिपत्य था इसके बाद विदेशी आक्रमणों ने इस क्षेत्र की बहुत क्षति की, क्योंकि तत्कालीन पंजाब का यह भाग भारत में प्रवेश का एक मार्ग था।

नवीन या आधुनिक इतिहास का प्रादुर्भाव हिसार के मध्यकालीन इतिहास का ही एक भाग है, यहाँ पर पहले तो हिन्दू शासको का राज्य था परंतु १३७५ में यहाँ पर फिरोज शाह तुगलक ने हमला कर दिया, हिन्दू राजाओ ने मुकाबला किया पर मुसलमानो की मक्कारी और कुछ अपनों की गद्दारी हिन्दू राजाओ की वीरता पर भारी पड़ गयी और राजा हार गए।

फिरोज शाह तुगलक इ एक किले का निर्माण करवाया जिसमे अरबी भाषा में ‘हिसार ऐ फिरोजा’ कहा गया जिसका मतलब होता था फिरोज का किला, अकबर के काल में इसमें से फिरोज हटा कर सिर्फ इसे हिसार का किला कहा जाने लगा।

जब १६वी शताब्दी में भारत का अधिकांश हिस्सा मुगलो के आधी था तब हिसार भी मुगलो के अधीन आ गया था, यहाँ से काफी लगान मुगलो के खजाने को जाता था क्योंकि या भूमि उपजाऊ थी.

मुगलो के बाद १८वी सदी में यहाँ एक बार १७८३ में अकाल पड़ा तब आयरलैंड के अभियानकर्ता जार्ज थामस ने इस पुरे शहर को एक दुर्ग में बदल कर अकाल से रक्षा की, उसी ने इस नगर को चारो तरफ दीवार से बन्द करके उसमे ४ दरबाजे बना दिए जिनके नाम नागोरी दरवाजा, मोरी दरवाजा,दिल्ली दरवाजा और तलाकी दरवाजा पड़ गया या रखा गया, १८वी शताब्दीं के अंत में इस क्षेत्र पर भट्टी और भटियाल लोगो के कब्ज़ा कर लिया, परन्तु १९वी शताब्दी में अंगेजो के अधीन आ गया, यहाँ पर भी १८५७ की क्रांति का कभी गहरा प्रभाव पड़ा.

जब देश १९४७ में आज़ाद हुआ तो पहले यह पंजाब प्रान्त का हिस्सा बना दिया गया और १९६६ में जब हरियाणा राज्य बना तब इसे हरियाणा में जोड़ दिया गया, यह है हिसार का एक संक्षिप्त इतिहास।

हिसार के दर्शनीय स्थल

हिसार में सम्राट अशोक के शासन काल में बना हुआ एक स्तम्भ है जो की दर्शको के लिए पर्यटन करने योग्य है, इस स्तम्भ में भी जंग नही लगी है

हिसार में एक संग्राहलय भी है जिसमे कुषाण कालीन सिक्के और अन्य महत्वपूर्ण अवशेष है जो हमारी प्राचीन संस्कृति की भव्यता को दर्शाते है

हिसार में एक किला भी है जिसे फिरोज शाह तुगलक ने बनवाया था, पहले इसे फिरोज का किला नाम से जाना जाता था बाद में अकबर ने इसे हिसार का किला नाम दिया, ये भी दर्शनीय है।
अग्रोहा धाम
सेंट थॉमस चर्च

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